एक चिंतन

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* कर्म बड़ा या जाति प्रश्न‌ यह तो चोखा है,कर्म बड़ा होता मानो, नहीं कोई धोखा है। कर्म से जीवन बनता, यह ही सब मानो।कर्म की गति-मति को, सब ही पहचानो। ऊँच-नीच में रखा नहीं कुछ, सब बेमानी,समता को धारण करने की क्यों न है ठानी। आज नया चिंतन, नव जीवन लाना … Read more

जिंदा हो क्या…??

सीमा जैन ‘निसर्ग’खड़गपुर (प.बंगाल)********************************* चाहे हाँ कहो या ना कहो, कुछ तो तुम प्रतिक्रिया करो,व्यवहार को सहज-सरल बनाकर, अपने विचार तो प्रकट करो ?गर ज़िंदा हो तो… सबूत भी दो। मुँह सिए तुम क्यों बैठे हो, क्यूँ सबको तकते रहते हो,आखिर कैसी दुश्वारी है, क्या-क्या मन में भरे हुए हो ?गर ज़िंदा हो तो… सबूत … Read more

हमने भारत देखा है

संजय सिंह ‘चन्दन’धनबाद (झारखंड )******************************** हमने अब तक भारत देखा है-जात-पात पर लड़ते-कटते,धर्म-सम्प्रदाय में बंटते-मिटतेप्रांतवादी-भाषावादी जहर उगलते,नर-नारी पर रोज उलझते। हमने अब तक भारत देखा है-उग्रवाद-नक्सलवाद को पनपते,सैनिक पराक्रम में परिजन को बिलखतेआज़ाद शहीदों की बात क्या वो थे देश में सस्ते,क्या क्यों दोगे ‘भारतरत्न’ तुम ? लूट लिए गुलदस्ते। हमने अब तक भारत देखा … Read more

इंसानियत का फ़र्ज निभा

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ चल रही है यह पवित्र यात्रा,भोले की भक्ति जिसमें शक्ति हैउठा काँवड़ रख कन्धे पर,और इंसानियत का फ़र्ज निभा। भेद-भाव त्याग कर नफ़रत मिटा,जिम्मेदार बन अपनी जिम्मेदारी निभाभोले तेरे साथ हैं बस जरा उन्हें बुला,और इंसानियत का फ़र्ज निभा। दु:ख-तकलीफ बहुत है संसार में,इसे मिटाने हेतु आगे आभूखे को भोजन … Read more

आया सावन झूमकर

urmila-kumari

उर्मिला कुमारी ‘साईप्रीत’कटनी (मध्यप्रदेश )********************************************** झूम-झूमकर काली बदरिया आज धरती पर,काले-काले घनघोर बदरिया सावन वर्षा धरती पर। हरी-भरी हुई अपनी वादियाँ, खेतों में फसलें लहराई,बरसात आगमन से देखो धरती ने ली फिर अंगड़ाई। सावन का महीना लगता सुहावना बरस रहा झूमकर,पावन है भोलेनाथ का महीना लाया वर्षा यह झूमकर। उमड़-घुमड़ कर छाई घटा है प्रकृति … Read more

काम करो, कुछ काम करो

हिमांशु हाड़गेबालाघाट (मध्यप्रदेश)**************************************** काम करो कुछ, काम करो,आराम नाम की नींद कोअब हराम करो,उठो युवाओं, जागकर कुछ काम करो। बीत रहा था जीवन तेरा,अंधियारों की घाटी मेंअब जागकर होश में आओ,काम करो, कुछ काम करो। सपने पूरे हों बड़े-बड़े,गाड़ी-बंगला-कारों केसमय भी तेरा साथ देगा,जब निकल पड़ेगा राहों पेकाम करो, कुछ काम करो। कठिनाई तेरे जीवन … Read more

पारिजात… महका-महका समां

संजीव एस. आहिरेनाशिक (महाराष्ट्र)********************************************* भली भोर में रिमझिम-रिमझिम लगा फूलों का झरना है,भीनी-भीनी खुशबुओं की कहाँ से उमड़ रही अभिसारना हैकितना सुन्दर और मनभावन, अनवरत फूलों का झरना हैरात चाँदनी और सिंदूरी संध्या, मिलकर दोनों ने दिया धरना है। घनी-घनी सी हरियाली बीच से फूल एक-एक उतर रहा है,जैसे ताराँगन आसमान का पंख लगाकर हौले … Read more

आज रिश्तों में प्रेम कहाँ

धर्मेंद्र शर्मा उपाध्यायसिरमौर (हिमाचल प्रदेश)******************************************************* कहाँ गया रिश्तों से प्रेम… चकाचौंध दुनिया ने सबको,हे आज कैसा भरमायाकोई किसी का नहीं यहाँ,सब है स्वार्थ और छलावा। सब अपनों तक सीमित रहते,नहीं रिश्तों का किसी को ध्यानओझल हो रही अपनी संस्कृति,बन रहे आज सभी विद्वान। पिता-पुत्र को जीना सिखाए,माता-पुत्री को देती सीखदादा-दादी की प्यारी कहानी,सुनकर सबको करती … Read more

बुरी दुनिया… अच्छी दुनिया

संजय एम. वासनिकमुम्बई (महाराष्ट्र)************************************* … जो खो गए हैं,वो सत्य को नहीं जानतेन कारण जानते,न प्रभाव जानतेन अपना लाभ जानते,न दूसरों का लाभ जानतेयदि वो खुद को भी नहीं जानते,तो वो पहले से ही खो चुके हैं। वो बचपन से ही भटके हुए हैं,गलत रास्ते पर जा चुके हैंबुरी चीजों के प्रति आसक्त होना,नशीले पदार्थों … Read more

विभाजन ने पक्के घर को तोड़ दिया

राधा गोयलनई दिल्ली****************************************** किसी गलतफहमी के कारण अपनों ने ही छोड़ दिया,थे इतने सम्बन्ध मधुर, जाने क्यों नाता तोड़ दिया ?घर बेशक छोटा था, लेकिन सबके दिल में बहुत जगह थी,गलतफहमियों की न जाने फिर ऐसी कौन-सी वजह थी ? सब भाइयों का विवाह हो गया, सबका ही परिवार बढ़ गया,जितना अधिक परिवार बढ़ा, उतना … Read more