सादगी अनुपम श्रृंगार

डॉ. श्राबनी चक्रवर्तीबिलासपुर (छतीसगढ़)************************************************* सर पर मोतियों का मुकुट सोहे,सावन में पिया को मोहेधरती धानी चुनर ओढ़े,नव वधु-सा कर श्रृंगार। माथे पर चाँद की बिंदी,हाथों में रुन-झुन कंगनबारिश की बूँदों की माला पहन,इठलाती चले पायल छनकाती। नयनों में काले मेघा कजरारे,बाँहों में बिजली चमके गरजेकानों में फूलों की बालियाँ लटकेकमर में बेल लताएं करधनी। छम-छम … Read more

प्रभाव में हूँ…

ऋचा गिरिदिल्ली*************************** अब मैं,मैं नहीं रही। सत्य को सत्य नहीं कहती,झूठ को झूठ नहीं कहतीदर्प को दर्प नहीं कहती,नम्र को नम्र नहीं कहतीअल्हड़ को अल्हड़ नहीं कहती,सरल को सरल नहीं कहतीनिरीहता को निरीहता नहीं कहती। मशीनों के प्रभाव में हूँ,इनपुट-आउटपुट के दायरे मेंबाइनरी नम्बर समझने लगी हूँ॥

अठ्ठाईस युग बीते, खड़े पांडुरंग

संजीव एस. आहिरेनाशिक (महाराष्ट्र)********************************************* यहाँ पंढरपुर नगरी में ईंट पर स्वयं परब्रम्ह खड़े,देख रहे मातृ-पितृ भक्ति पुंडलिक की खड़े-खड़ेवाह पुंडलिक! धन्य तुम्हारी भक्ति जो है सच्चा सच,देख जीवन का मतितार्थ बोले विठ्ठल हो अचरज। आओ आओ पुंडलिक, मैं खड़ा कबसे तुम्हारे द्वार,देख तुम्हारी मातृ-पितृ भक्ति, आया करने उद्धाररुको पांडुरंगा रहो वहीं पर खड़े, मेरे माँ-बाप … Read more

कल्याण करो, जग लेगा नाम

संजय सिंह ‘चन्दन’धनबाद (झारखंड )******************************** रामायण में जन कल्याण,सुख-समृद्धि कृपा निधानसार्थक जीवन यही विधान,चौपाई नित्य-दोहा करें गुणगान।भैया जप लो जय सिया राम… दिशा भी देंगे प्रभु मेरे श्री राम,कल्याण की शक्ति अनंत महानकल्याण की किरणें राह समान,सोचों जैसा वैसा ही होगा काम।भैया जप लो जय सिया राम… सुख-समृद्धि देता जन कल्याण,जन-जन में श्री राम पवित्रणामकल्याण … Read more

रिश्ते हो गए बेमानी

राजबाला शर्मा ‘दीप’अजमेर(राजस्थान)******************************************* कहाँ गया रिश्तों से प्रेम…?.. रिश्ते हो गए हैं बेमानी,मतलब का ही प्यार रहा हैजीवनभर जो साथ निभाए,अब न ऐसा यार रहा है। अपने में सब रहें उलझते,खैर खबर न सुनते, कहतेघर में जितने भी रहते पर,मोबाइल में व्यस्त ही रहते।मिलावटी हो गया नेह,भावों का न सत्कार रहा है…॥ संवेदना खो गई … Read more

बादलों से

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** मेघों से घिरती हवाएँ चली आयी हैं,संग-संग अपने पावस-फुहार लायी हैं।गर्मी भी दूर हुई, नाचते हैं मोर कहीं,कोयल की कुहुक राग सबके मन भायी है। बाग-बगीचे सब पानी में धुल गये हैं,लगता किसी ने हरी चूनर पहनाई है।प्रेम और स्नेह की उमंग फैली चारों ओर,सजी हुई वसुंधरा आज मन भायी है।

स्वार्थ-कपट से मिटा प्रेम

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला (मध्यप्रदेश)******************************************* कहाँ गया रिश्तों में प्रेम…?… बतला दे कोई मुझको अब, कहाँ गया रिश्तों में प्रेम।स्वार्थ, कपट से लोग भरे हैं, मिटा इसी से अब तो प्रेम॥ नहीं भावना शेष रही अब, क्षुद्र हो गए सबके मन।त्याग, नेह ने मातम पाया, नातों में दिखती अनबन॥आस्तीनों में साँप रह रहे, दिल से … Read more

हमसफ़र हुई बारिश

सुश्री अंजुमन मंसूरी ‘आरज़ू’छिंदवाड़ा (मध्य प्रदेश)****************************************** बेशतर हुई चाहे, मुख़्तसर+हुई बारिशवस्ल-ओ-हिज्र दोनों में, मो’तबर+ हुई बारिश। दिल के भीगे काग़ज़ पर, ‘ऐन-शीन-क़ाफ़’ उभराउंगलियों की हरकत से, उफ़ शरर हुई बारिश। वक़्त-ए-रुख़सती जिनको, थी विदा’अ की जल्दी,उनको रोके रखने में, कारगर हुई बारिश। पहले दूर जाते तक, रोए बिन उन्हें देखा,फिर हमारी आँखों की, हमसफ़र हुई … Read more

रिमझिम फुहार

जी.एल. जैनजबलपुर (मध्यप्रदेश)************************************* आई सावन की, रिमझिम फुहार,प्रेमी-प्रेमिका का, दिल है बेकरारमिले शुद्ध वायु, दूर बीमारी हजार,बहे त्रिवेणी, गाँव-शहर घर के द्वार।लगा लो पेड़ नीम-पीपल-बरगद यार… आई सावन की, रिमझिम फुहार,समधी-समधन का दिल है बेकरारमिले रोगों का, आयुर्वेद उपचार,बहे त्रिवेणी गाँव-शहर घर के द्वार।लगा लो पेड़ नीम-पीपल-बरगद यार… आई सावन की, रिमझिम फुहार,साली-जीजा का दिल … Read more

आसमान बरसी घटा

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* प्रकृति कहर ढाती धरा, आषाढ़ी अतिवृष्टि।बना जलधि आधा जगत, महाप्रलय घनदृष्टि॥ आधा भारत जल भरा, आयी भीषण बाढ़।आसमान बरसी घटा, अभी मास आषाढ़॥ फैली दहशत बारिशें, नदियों बाढ़ उफान।घर जन दौलत सब बहे, गई हजारों जान॥ कम्पन वर्षण भूक्षरण, लगे प्रकृति आरोप।गिरि वन तरु कर्तन दुखी, कुदरत दिखे प्रकोप॥ … Read more