बसंत तो ताज
डॉ.एन.के. सेठीबांदीकुई (राजस्थान) ********************************************* ज़िंदगी एक वसंत (वसंत पंचमी विशेष)… महके सरसों पीली,लगे धरा सुनहली,लगती ज्यों दुल्हन-सी,आया ऋतुराज है॥ कोयल सुनाए गीत,भ्रमर निभाए रीत,आम भी लगे बौराने,बसंत तो ताज है॥ तन-मन अब डोले,हिय के बंधन खोले,चहुॅं ओर है खुशियाँ,सज गए साज हैं॥ धूप भी है अलसाई,ऋतु सबको ये भायी,हो जाते हैं मदहोश,प्रकृति का काज है॥ … Read more