अनिश्चित विश्व का विलाप

डॉ. शैलेश शुक्लाबेल्लारी (कर्नाटक)**************************************** अंधियारे में डूबा दिख रहा है सम्पूर्ण संसार,भविष्य में दिख रहा हर ओर बस अंधकारकहीं है महामारी तो कहीं है युद्ध की आग,सुख-शांति की चाह में, हर ओर दौड़-भाग। जलवायु बदल रही, धरती है देखो रोती,नदी-तालाब सूख रहे, धरा हरियाली खोतीतकनीक बढ़ रही लेकिन प्रकृति पीछे छूट रही,लोभ की दौड़ में … Read more

कर्तव्य करते जाना

ममता सिंहधनबाद (झारखंड)***************************************** कर्तव्य करते जाना है, दिल में सुकून लाना है,कर्तव्य अपना पूर्ण करूँ, ऐसा मन में ठाना है। कर्तव्य कार्य मिलता है, सिर्फ मानवों को ही,भाग्य मिले पशुओं को, क्या किसी ने जाना है ? कर्तव्य सभी अपना, ईमानदारी से करें परिपूर्ण,ईश्वर से डरें सब, क्यों किसी को नर्क में जाना है ? … Read more

सारी दुनिया छोड़कर

दीप्ति खरेमंडला (मध्यप्रदेश)************************************* सारी दुनिया छोड़कर,मैंने तुमको चुन लियादुनिया के इस मेले में,सच्चा सुकून पा लिया।सारी दुनिया छोड़कर… न नाम की चाह रही,न दिल पर रिश्तों का बोझबेफिक्री का आलम है,जबसे नाता तुमसे जोड़ लिया।सारी दुनिया छोड़कर… न वैभव न यश की चाह,न ही कोई कामना अबजो छूटा वो तेरी माया,तेरा तुझको अर्पण कर दिया।सारी … Read more

शिव चंदन का वृक्ष

प्रीति तिवारी कश्मीरा ‘वंदना शिवदासी’सहारनपुर (उप्र)************************************************** शिव चंदन का वृक्ष है जग में, मैं हूँ विष की बेली।बन भुजंग लिपटत हूँ उनसे तड़पत फिरूं अकेली॥ शिव अति शीतल मन माया अगन भरी,विषय-भोग अटखेली नित-नित विषय-भोग अटखेली॥ भजन को रस जागा भगति में मन लागा,शरणागत‌ मैं चेली गुरु शिव ‌ शरणागत मैं चेली॥ नाम स्वाद चख … Read more

मुँह पर थप्पड़

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* यह जानते ही मानसी ने जयंत को फोन किया। पहले तो जयंत ने मानसी का फोन अटैंड नहीं किया, और जब फोन उठाया तो सीधे जवाब देने की बजाय टाल-मटोली करता रहा, और जब मानसी ने सीधे सीधे सवाल किया कि,”जयंत तुम यह बताओ कि वह तुम्हारे जो चाचाजी दहेज की … Read more

मतभेद

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* भीड़ में सच अकेला पड़े, तालियों में बस शोर मचे,भाषा पर भी झगड़े यहाँ, मुख शब्दों में तलवार बसेसंस्कृति के नाम पर टोले, रचते सभी अपनी दीवार,मतभेदों की धूप जले पथ, मात्र रिश्तों में दरार बसे। नारे बनें विचार यहाँ पर, मंचों पर मिथ व्यापार खिले,वादों की फसल लहलहातीं, … Read more

कीमती आजादी

राधा गोयलनई दिल्ली****************************************** “हमें बोलने की आजादी है। जीने की आजादी है।” कुछ बिगड़ैल लोग बोले।एक छात्र- “किसने कहा, कि तुम्हें बोलने की आजादी नहीं है ? हमारे देश में संविधान में ही सभी को अभिव्यक्ति की आजादी है। सभी को जीने की आजादी है।”“मानते हो ना इस बात को ?”“बिल्कुल, लेकिन अभी मेरी बात … Read more

एक सफ़र….

ममता सिंहधनबाद (झारखंड)***************************************** ज़िन्दगी के सफर में, कुछ भूले, कुछ याद रह जाते हैं,ज़िन्दगी के सफ़र में, कुछ जीत कुछ हार जाते हैंज़िन्दगी हमारी परीक्षा लेती है, हम समझ नहीं पाते हैं। ज़िन्दगी के सफ़र में, कुछ हँसते रहते हैं, कुछ रोते रहते हैं,ज़िन्दगी के सफ़र में, कुछ मिल जाते हैं, कुछ छूट जाते हैंज़िन्दगी … Read more

हिन्द की बेटी हूँ

कुमारी ऋतंभरामुजफ्फरपुर (बिहार)************************************************ बंदिशों के पिंजरों को छोड़ के चली हूँ मैं,छूना है गगन को, हवाओं से लड़ी हूँ मैंधरती पर रह रही थी कब सेआज गगन को छू रही हूँ मैं। पहचान है मेरी जो उस पर,आज पहुंच रही हूँ मैंमाँ भारती की बेटी हूँ, जो चाहूं पाके रहती हूँहाँ, मैं बेटी हूँ, हाँ … Read more

पिकनिक जाएंगे

डॉ. गायत्री शर्मा ’प्रीत’इन्दौर (मध्यप्रदेश )******************************************* पिकनिक जायेंगे हम सब तो, नदी किनारे बैठेंगे।नाचें-कूदें शोर मचायें, लुका-छिपी खेलेंगे॥ ऊँची-नीची घाटी सुंदर, सबका मन बहलाती है,फूलों की बगिया है सुंदर, जो जादू दिखलाती है।जल्दी चलो करो तैयारी, सब मिलकर हम घूमेंगे,पिकनिक जाएंगे हम सब तो, नदी किनारे बैठेंगे…॥ सखियाँ सारी संग चलेगीं, छुट्टी है प्यारा इतवार,चलो … Read more