हिन्द की बेटी हूँ
कुमारी ऋतंभरामुजफ्फरपुर (बिहार)************************************************ बंदिशों के पिंजरों को छोड़ के चली हूँ मैं,छूना है गगन को, हवाओं से लड़ी हूँ मैंधरती पर रह रही थी कब सेआज गगन को छू रही हूँ मैं। पहचान है मेरी जो उस पर,आज पहुंच रही हूँ मैंमाँ भारती की बेटी हूँ, जो चाहूं पाके रहती हूँहाँ, मैं बेटी हूँ, हाँ … Read more