हिन्द की बेटी हूँ

कुमारी ऋतंभरामुजफ्फरपुर (बिहार)************************************************ बंदिशों के पिंजरों को छोड़ के चली हूँ मैं,छूना है गगन को, हवाओं से लड़ी हूँ मैंधरती पर रह रही थी कब सेआज गगन को छू रही हूँ मैं। पहचान है मेरी जो उस पर,आज पहुंच रही हूँ मैंमाँ भारती की बेटी हूँ, जो चाहूं पाके रहती हूँहाँ, मैं बेटी हूँ, हाँ … Read more

पथ पर चल रहे हम…

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ पथ पर चल रहे हम,सफ़र है जो खत्म नहीं होताहर एक रास्ता निकल ही जाता हैकहीं ना कहीं,इसलिए पथ पर चल रहे हैं हम। रुकना नहीं है, हमें चलते जाना है,तभी तो मंज़िल मिलेगीरास्ता यूँ ही कट जाएगा,पथ पर चल रहे हैं हम। राह में मुश्किल बड़ी होती हैढूंढते रहते … Read more

हिन्द की नारी

कुमारी ऋतंभरामुजफ्फरपुर (बिहार)************************************************ हम हैं हिन्द की नारी,बस देश के लिए ही कुछ काम करना हैइसमें ना कोई भी अंदेशा है,हैं हम हिन्द की नारी। तुम क्यों अब गुफ्तगू में बैठे हो ?क्यों तुम कायरता में समय खोए होकरना है अब मुझे देश की सेवा,क्यूँ तुम फालतू-सी बातों में! क्यूँ उसमें तुम अब देर करते … Read more

किया युवाओं में अद्भुत संचार

ममता सिंहधनबाद (झारखंड)***************************************** होशंगाबाद में जन्म लिए माखन लाल चतुर्वेदी,माता सुंदरी बाई और पिता थे नंदलाल चतुर्वेदी। चार अप्रैल अठारह सौ नवासी मध्य प्रदेश जन्म,विधा थी काव्य, निबंध, नाटक और संस्मरण। पत्नी ग्यारसी बाई, उपनाम ‘एक भारतीय आत्मा’,संपादन और पत्रिका ‘कर्मवीर प्रताप’ औेर ‘प्रभा’। आधुनिक काल ओजपूर्ण, भावात्मक स्वतंत्रता सेनानी,कविता ‘दीप से दीप जले, एक … Read more

उत्सव मनाएं, शान सजाएं

सरोज प्रजापति ‘सरोज’मंडी (हिमाचल प्रदेश)*************************************** उत्सव मनाएं, उत्सव मनाएं,आज राष्ट्र की शान सजाएंजन गण मन अधिनायक गाएं,आज राष्ट्र की शान सजाएं। सब मिल देश धवजा फहराएं,ध्वजा फहराएं, मंगल गाएंदेकर बधाई उत्सव मनाएं,गणतंत्र दिवस, शान सजाएं। जाति-पाति का भेद मिटाएं,ऊँच-नीच को जड़ से मिटाएंबंधुत्व सहयोग, आओ बढ़ाएं,देश की रक्षा, लहू में समाए। निर्वाचन का महत्व समझें,निर्वाचन … Read more

‘विफलता’ तुम मत आना

कुमारी ऋतंभरामुजफ्फरपुर (बिहार)************************************************ विफलता तुम मत आना मेरी गली,हम सफलता की सहेली हैंहमने हर विफलता को भगाया है,दर्द के पन्नों को फाड़ा है। गुलाब-सी खिली सफलता की,पंखुरियों को जीवन ने सजाया हैवर्णन करती हूँ सबसे मैं सफलता का,विफलता तू ना आना मेरी गली। चरित्र मेरा सफल है,क्यों मैं विफलता से डरूँ ?खिले फूल हैं जीवन … Read more

अकेला चलता पथिक

दीप्ति खरेमंडला (मध्यप्रदेश)************************************* कांधे पर संघर्षों का भार,आँखों में सपने हज़ारमंज़िल की राह पर चला अकेला,पथिक न माने कभी भी हार। नहीं राह आसान लक्ष्य की,पर मन में अटूट विश्वास हैमिल ही जाएगी मंज़िल उसको,साहस और धीरज जिसके पास है। थकने पर भी जो रुके नहीं,वही लक्ष्य तक जाता हैअकेले चलना जो सीख गया,वह भीड़ … Read more

खुद को खुद से जान लो

ममता सिंहधनबाद (झारखंड)***************************************** गाली खाना गाली देना है, यहाँ की तो रीत पुरानी,शान है ये पुश्तैनी जब, बात-बात पर देते हैं गाली। बिना गाली थाली खाली, जैसी होती इनकी दीवाली,छोटे बच्चे भी बड़ों से कम नहीं, शान को बढ़ाए गाली। चार-पाँच की संख्या में, मिलकर सब सिगरेट हैं पीते,खुद को समझें राजा, बाबू जैसे जीवन … Read more

भारत का संविधान लिखित विधान

संजय एम. वासनिकमुम्बई (महाराष्ट्र)************************************* गणतंत्र:संविधान से आम आदमी तक…. सालों की पराधीनता के चलते,हमें यह अहसास हो गयाअब ना सहेंगे ज़ंजीरें ग़ुलामी की,अब हमारे सिर है धुन आज़ादी की। मतवालों ने जान तक क़ुर्बान कर दी,स्वतंत्रता सैनिकों ने लड़ाई छेड़ दीनत हुआ दुश्मन डालकर हथियार,हो गया भारत को आज़ाद करने तैयार। बीच अगस्त में भारत … Read more

नश्वरता

सीमा जैन ‘निसर्ग’खड़गपुर (प.बंगाल)********************************* फिर एक कविता आकार लेने लगी है,भीगे शब्दों के वसन धारण करने लगी हैवो जो पड़ा है जमीं पर… निर्विकल्प-सा,उसकी सौहार्द्रता का गुणगान करने लगी हैफिर से एक कविता आकार लेने लगी है। घटनाएँ खास वाली, बताई जा रही है,उसकी पूरी ज़िंदगी, गुनगुनाई जा रही हैअजनबियों को यादगार किस्से कहकर,ज़िंदगी-भर की … Read more