अदभुत प्रकृति
शंकरलाल जांगिड़ ‘शंकर दादाजी’रावतसर(राजस्थान) ********************************************************** ईश्वर की संरचना देखो कितनी अद्भुत कितनी प्यारी।कैसे-कैसे फूल खिलाये हर खुशबू है न्यारी न्यारी॥ सूरज-चाँद-सितारे, उसने खेल-खिलौने अज़ब बनाये,है आश्चर्य शून्य से नभ में, इन सबको कैसे लटकाये।पशु-पक्षी मानव निर्मित कर महका दी सारी फुलवारी,कैसे-कैसे फूल…॥ झरनों की कल-कल से लगता, मधुर कहीं पर साज बज रहा,तार कस रहे हैं … Read more