सृष्टि रच रही असर…
हीरा सिंह चाहिल ‘बिल्ले’बिलासपुर (छत्तीसगढ़)********************************************* शाख हिले पवन से,फूल-कली झूलते।बिन दिखे पवन चले,पौध मगन खेलते।खार रहे शाख पर,फूल को मिले शिखर।सीखती न ज़िंदगी,सृष्टि रच रही असर॥ वक्त यहाॅं साथ में,जन्म से बना रहा,सुख सभी भुला दिये,दुखों में बुरा कहा।तय समय बना हुआ,हालतें दिया करेहर पहर खिली रहे,सृष्टि से रौशनी॥सूर्य किरण भोर में,शाम रात चाॅंदनी,क्यों मलाल … Read more