हमारी हिन्दी
शंकरलाल जांगिड़ ‘शंकर दादाजी’रावतसर(राजस्थान) ****************************************** हिन्द देश के वासी हैं हिन्दी हमको अपनाना है।गाँव-गाँव,कूचे-कूचे में हिन्दी को पहुँचाना है॥ हिन्दी हो भाषा अपनी हिन्दुस्तानी परिवेश हो,संस्कार संस्कृति हो अपनी उन्नत भारत देश हो।जो पश्चिम की होड़ कर रहे,उन्हें यही समझाना है,गाँव-गाँव,कूचे-कूचे…॥ गर्व हमें संस्कृत भाषा पर हम पर ये उपकार किया,हिन्दी भाषा दी हमको कितना सुन्दर … Read more