मन के ‘मैं’ को मारो
डॉ.एन.के. सेठीबांदीकुई (राजस्थान) ********************************************* रावण बैठा है घर-घर में,अपने अंदर राम सॅंवारो।दोष नहीं देखें पर जन में,अपने मन के ‘मैं’ को मारो॥ हर बार जलाते पुतले को,रावण कभी नहीं है मरता।घर-घर में है कथा राम की,अट्टहास दसकंधर करता॥बीत चुके हैं वर्ष सहस्रों,अब तो राघव मन में धारो।दोष नहीं देखें पर जन में,अपने मन के ‘मैं’ … Read more