जय भारत

डॉ.एन.के. सेठीबांदीकुई (राजस्थान) ********************************************* रचनाशिल्प:विधान-३२ मात्राएँ–१०, ८, ८, ६…. जय भारत वंदन, भू रज चंदन,गौरवशाली, है गाथा।हिंद की है शान, तिरंगा मान,रखता ऊँचा, ये माथा।हिमशैल है भाल, करे प्रतिपाल,रक्षा करते, हैं प्रहरी।सागर है रक्षक, अरि का भक्षक,रक्षा खाई, है गहरी॥ जय भारत माता, जग विख्याता,करती सबकी, रखवाली।जय वीर प्रसविनी, भारत जननी,देती सबको, खुशहाली।बहती है गंगा, … Read more

माया में फँसता अज्ञानी

डॉ.एन.के. सेठीबांदीकुई (राजस्थान) ********************************************* रचनाशिल्प:१०, ८, ८, ६…. माया में फॅंसता, ईश्वर भी हँसता कैसा मानव, अज्ञानी।जीवन भर रोता, कभी न सोता,करता है वह, नादानी।प्रभु से विरत रहे, पापरत रहे,करता रहता, मनमानी।माया है ठगिनी, जीवनहरिणी,कर देती ये, हैरानी॥ माया का बंधन, दिखता चंदन,अंत बड़ा ही, दुःख भरा।मन को भटकाता, रूप दिखाता,लगता है सब, हरा-हरा।नश्वर है … Read more

पुण्य धरा है हिन्द

डॉ.एन.के. सेठीबांदीकुई (राजस्थान) ********************************************* गणतंत्र:संविधान से आम आदमी तक (२६ जनवरी विशेष)… आन बान अरु शान, तिरंगा मान हमारा।हमको इस पर गर्व, हमें प्राणों से प्यारा।तीन रंग का मेल, शान से यह लहराता।चक्र सुशोभित मध्य, सभी के मन को भाता॥ केसरिया है रंग, शौर्य को ये बतलाता।श्वेत रंग है मध्य, हृदय में शान्ति बढ़ाता।हरित वर्ण … Read more

घोर प्रदूषण

डॉ.एन.के. सेठीबांदीकुई (राजस्थान) ********************************************* फैल रहा चहुँ और, जगत में घोर प्रदूषण।प्रतिदिन बढ़ते रोग, मिटे यह जीवन प्रति क्षण॥दोहन करता नित्य, मनुज कुदरत का जग में।मारे तीक्ष्ण कुठार, स्वयं ही अपने पग में॥ भौतिकता की होड़, मची है जीवन के रण।मनुज आज बेहाल, सृष्टि में दूषित कण कण॥जल थल नभ अरु वायु, प्रदूषित है जग … Read more

नववर्ष

डॉ.एन.के. सेठीबांदीकुई (राजस्थान) ********************************************* ‘स्वागत, संकल्प, संघर्ष और सफलता’ (नववर्ष २०२६ विशेष)… रचना शिल्प:११२ २११ २१२ १११ २१ नव आशा भर आ गया नवल वर्ष।धरती स्वागत में सजी सुमन हर्ष॥कलियाँ नूतन रूपवान अभिराम।चलती शीतल-सी बयार अविराम॥ शुभ हो ये नववर्ष का नव प्रभात।मन का बाग खिले बने सबल गात॥खुशियों का जग में प्रसार चहुँओर।खिलते पल्लव … Read more

खिली चाँदनी रात

डॉ.एन.के. सेठी ‘नवल’बांदीकुई (राजस्थान) ********************************************* खिली चाँदनी रात,चंद्रमा नभ में चमके।तिथी पूर्णिमा आज,धरा भी दम दम दमके॥चारों ओर उजास,तमस को दूर भगाए।धवल रश्मियाँ खूब,सुधा जग में बरसाए॥ देख पूर्णिमा चंद्र,शान्त मन हर्षित होता।अष्ट कला परिपूर्ण,कलानिधि तम को खोता॥शोभित शिव के भाल,मान ये पाता जग में।होकर के परिपूर्ण,प्रकाशित होता नभ में॥ परिचय-पेशे से अर्द्ध सरकारी महाविद्यालय … Read more

दीपावली:करे जग में उजियारा

डॉ.एन.के. सेठी ‘नवल’बांदीकुई (राजस्थान) ********************************************* दीप जलें, मन महके (दीपावली विशेष)…. पंच दिवस का पर्व, हर्ष से सभी मनाते।करें स्वच्छ घर द्वार, खीर पकवान बनाते॥दीपों का त्यौहार, करे जग में उजियारा।लक्ष्मी का हो वास, मिटे हर मन अँधियारा॥ धनतेरस का पर्व, खुशी घर-घर में लाए।लक्ष्मी संग गणेश,ऋद्धि और सिद्धि आए॥धन्वंतरि हैं वैद्य, औषधि के हैं … Read more

नीर बादल बरसाते

डॉ.एन.के. सेठी ‘नवल’बांदीकुई (राजस्थान) ********************************************* बादल करते शोर, दामिनी दम-दम दमके।भीत कामिनी नार, आसमां चमचम चमके॥बरसे सावन मास, सभी जन हर-हर बोले।पाएं शिव आशीश, नाथ शिव शंकर भोले॥ गाओ मस्त मल्हार, झूम के बादल आए।करते गर्जन घोर, धरा की प्यास बुझाए॥डूबे सड़कें ग्राम, उफनते नदियाँ- नाले।कुदरत का यह खेल, हमें अचरज में डाले॥ भर गए … Read more

छह साल की बच्ची हूँ…

डॉ.आशा आजाद ‘कृति’कोरबा (छत्तीसगढ़)**************************************** मैं हूँ छह साल की बच्ची, बोलो क्या है दोष।बलात्कार को झेल रही हूँ, मुझ पर क्यों है रोष॥ नटखट मेरी सोच जान लें, कुटिल पाप हुए सोच।खेल रहीं मैं नि:स्वार्थ भाव से, फिर भी रहे है नोंच॥ क्या तन मेरा नारी जैसा, क्या तन पर धरा विकास।रिश्ते संग बहलाकर मुझको, … Read more

सतत करें अभ्यास

डॉ.एन.के. सेठी ‘नवल’बांदीकुई (राजस्थान) ********************************************* सतत् करें अभ्यास, काव्य बन जाए न्यारा।बनें काव्य मर्मज्ञ, काव्य रस बहती धारा॥सुधिजन देते मान, सुयश जीवन में खिलता।कवि की सृष्टि अपार,नहीं दुख इसमें मिलता॥ बिना किए अभ्यास, ज्ञान मिट जाता सारा।जीवन हो रसहीन, अकेला मनुज बिचारा॥करिए नित्य सुधार, तभी जीवन बदलेगा।नित्य बढ़ाएं ज्ञान, तमस अज्ञान हटेगा॥ परिचय-पेशे से अर्द्ध … Read more