ऊँच-नीच को मिटाया

दिनेश कुमार प्रजापत ‘तूफानी’दौसा(राजस्थान)***************************************** विवेकानन्द जयन्ती विशेष…. जिसका कंठ सुरीला,था युवा नेता छबीला,माँ शारदे के लाल की आरती उतारेंगे।ऊँच-नीच को मिटाया,नारी शिक्षा को बढ़ाया,विवेकानंद के पद,राम से पखारेंगे। भारती के पूत उठो,जागो तब तक भागो,लक्ष्य नहीं मिले यदि,जन्म जन्म वारेंगे।धर्मों का किया सम्मान,नहीं किया अपमान,ऐसी महान आत्मा को,मन में उतारेंगे॥

सदा सर्वप्रिय अटल

डॉ.धारा बल्लभ पाण्डेय’आलोक’अल्मोड़ा(उत्तराखंड) *************************************** अटलबिहारी वाजपेयी विशेष…… रचना शिल्प:२२ मात्रा,१२:१० पर यति,४ चरण,२-२ चरण समतुकांत रचते रचना महान,शब्द के पुजारी।गढ़ते स्वच्छंद पंक्ति,शुद्ध मन विचारी॥कर्म-धर्म-मर्म ज्ञान,शब्द सार भारी।राष्ट्रप्रेम भाव हृदय,शब्द अर्थ धारी॥ प्रखर वक्ता देशभक्त,विमल हृदय धारी।प्रेम पूर्ण शुद्ध भाव,मन अटल बिहारी॥महानेता प्रखर कवि,सत्य वचन पालक।जन-मन में बसे अटल,राष्ट्र प्रजापालक॥ देश के प्रधान उच्च,सर्वश्रेष्ठ सेवी।दोष-खोटहीन कुशल,प्रेम … Read more

असमानता

डॉ.धारा बल्लभ पाण्डेय’आलोक’अल्मोड़ा(उत्तराखंड) *************************************** न हो कभी असमान भावना,नहीं विषमता प्रेम हो।जग में रखना प्रेम भावना,कभी न मन उद्वेग हो॥ ईश्वर के ही जीव चराचर,वह सब कुछ है जानता।ईश्वर की ही कृपा सभी पर,पूजा सबकी मानता॥सदा प्रेम हो दीन-दुखी से,हीन भाव मन में न हो।जग में रखना प्रेम भावना,कभी न मन उद्वेग हो॥ न हो … Read more

आनंद

डॉ.धारा बल्लभ पाण्डेय’आलोक’अल्मोड़ा(उत्तराखंड) *************************************** जीवन में उत्साह भरा हो,करो सुकर्म उमंग में।भर साहस उद्यम में मन हो,मिल-जुल कर के संग में॥ सकल पदार्थ दिए हैं प्रभु ने,है परिश्रम करना भलो,उद्यम से ही सब मिलता है,पाकर जीवन में चलो॥सदा कर्म निष्ठा से पायें,श्रमसाधन की जंग में।भर साहस उद्यम में मन हो,मिल-जुल कर के संग में॥ जीवन … Read more

सदाचरण

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश) ******************************************* नहीं दुराव,हो उठाव,आज तो पले विवेक।सही बहाव,हो उड़ान,रीति,नीति प्यार नेक॥सुशील हो,न कील हो,बढ़ोतरी करो विनीत।जहान धर्म-कर्म मान,मीत गीत हो पुनीत॥ महान ज्ञान वान संत,जो कहें वरो सुजान।ग़रीब तो सभी यहाँ सभी,रहो सुधर्म मान॥सुदीप जो जले,उजास का रहे यहाँ प्रभाव।परोपकार मान लो,नहीं रहे ज़रा अभाव॥ सदा दिली लगाव,तो रहे सदा भला … Read more

शत्-शत् नमन

डॉ. अनिल कुमार बाजपेयीजबलपुर (मध्यप्रदेश)*********************************** रहे हो जा कहाँ पर तुम।        वतन की छोड़के गलियाँ॥सिसकते रह गए हैं सब।        चमन के फूल ये  कलियाँ॥उदासी छा गयी मन में।                नयन आँसू बहाते हैं॥तड़पता देश है सारा।            विपिन जी … Read more

नया सवेरा आएगा

डॉ.धारा बल्लभ पाण्डेय’आलोक’अल्मोड़ा(उत्तराखंड) *************************************** रचना शिल्प: मात्राभार -३०,यति- १६,१४,पदांत-२२२ कोरोना की बीमारी का,शीघ्र अंत हो जाएगा।दु:ख की काली घटा छँटेगी,नया सवेरा आएगा॥ भुगता है बीते वर्षों से,इसने डेरा डाला है।अब भी इसके रूप निराले,समग्र जग को घेरा है॥प्रभावशाली टीके से अब,यह कोरोना हारेगा।दु:ख की काली घटा छँटेगी,नया सवेरा आएगा॥ कोरोना की बीमारी का,शीघ्र अंत हो … Read more

श्रद्धासुमन

डॉ. अनिल कुमार बाजपेयीजबलपुर (मध्यप्रदेश)*********************************** मेरी सेना के योद्धा (केंद्र- जनरल बिपिन रावत) हर नगर में हर डगर में,बह रहे हैं नैन क्यूँ।हो गए हैं मन विकल अब,छिन गए हैं चैन क्यूँ॥कौन-सा ये फूल जाकर,गोद में प्रभु की खिला।आसमां का था सितारा,आसमां से जा मिला॥ परिचय– डॉ. अनिल कुमार बाजपेयी ने एम.एस-सी. सहित डी.एस-सी. एवं पी-एच.डी. … Read more

नमन देश की माटी चंदन

डॉ.धारा बल्लभ पाण्डेय’आलोक’अल्मोड़ा(उत्तराखंड) *************************************** ७५ बरस की आजादी का अमृत और हम सपर्धा विशेष…. नमन देश की माटी चंदन,हे माँ,तुझे प्रणाम।स्वर्ग-सी पावन निर्मल आभा,मंगलमय अभिराम॥ विश्व बंदिनी मातृभूमि जय,भारत देश महान।वीर शहीदों की धरती माँ,शक्ति-भक्ति वरदान॥जय-जय कोटि कोटि देवों की, ऋषि-मुनियों की धाम।स्वर्ग-सी पावन निर्मल आभा,मंगलमय अभिराम॥ बहु भाषा-भाषी जन इसका,करते मंगल गान।बहु संस्कृति धर्मों … Read more

राधे के मन श्याम

बोधन राम निषाद ‘राज’ कबीरधाम (छत्तीसगढ़)************************************** रचनाशिल्प:मात्रा १६/११….. श्याम बसे राधा के मन में,यदु नंदन घन श्याम।हुई बावरी दर्शन खातिर,ढूँढे सुबह व शाम॥ वन-वन फिरती प्रेम दिवानी,कालिंदी के पास।लगन लगे लीलाधारी से,एक आस विश्वास॥साँस-साँस में श्याम रमा है,रटती है अविराम।हुई बावरी दर्शन खातिर,… यमुना के पावन जल भीतर,परछाई चितचोर।कहाँ छुपे हो कान्हा मेरे,गलियन करती शोर॥मन आँगन … Read more