रूप का प्याला
डॉ. अनिल कुमार बाजपेयीजबलपुर (मध्यप्रदेश)*********************************** छलकते रूप का प्याला,बना ये चाँद-सा मुखड़ा,लगे जैसे उतर आया,हसीं इक ख़्वाब का टुकड़ा।गगन के चाँद-तारे भी,तुम्हारे रूप पर मोहित,गुलाबी से अधर तेरे,सुनहरे रूप पर शोभित॥ निगाहों में सजे सपने,कहीं कोई झलक तो है,नहीं देखे उन्हें कोई,झुकी-सी ये पलक तो है।घनी जुल्फें घटा बनकर,चमकते चाँद पर छाई,बढ़ी हैं धड़कनें दिल … Read more