निगाहें राह तकती

कुमकुम कुमारी ‘काव्याकृति’मुंगेर (बिहार)********************************************** चले आओ पनाहों में, निगाहें राह तकती है।बताएं क्या तुम्हें दिलवर, तुम्हीं में जान बसती है॥सुनो सजना तुम्हें मैंने, तहे दिल से पुकारा है।चले आओ सजन मेरे, बड़ा दिलकश नजारा है॥ बहारों ने फिजाओं में, गुलों को यूँ खिलाया है।लगे जैसे कि अम्बर ने, नवल मोती सजाया है॥चले आओ सनम मेरे, … Read more

वेदमाता भवानी

कुमकुम कुमारी ‘काव्याकृति’मुंगेर (बिहार)********************************************** वसंत पंचमी: ज्ञान, कला और संस्कृति का उत्सव… करूँगी सदा वंदना मैं तुम्हारी,भवानी सुनो प्रार्थना है हमारी।बना दो विवेकी हरो अंधियारा,पुत्री हूँ तुम्हारी बनो माँ सहारा। मिटा दो भवानी अज्ञता हमारी,करूँगी सदा वंदना मैं तुम्हारी…॥ पता है तुम्हें मैं बड़ी हूँ अज्ञानी,तुम्हीं वेदमाता तुम्हीं हो भवानी।सुनो माँ भवानी पुत्री हूँ तुम्हारी,करो … Read more

सरस्वती वंदना

सुश्री अंजुमन मंसूरी ‘आरज़ू’छिंदवाड़ा (मध्य प्रदेश)****************************************** रचनाशिल्प- २१२२ २१२२ २१२… शारदे यश विद्या बुद्धि ज्ञान दे।माँ तनिक भी मत हमें अभिमान दे॥ श्री कलाधारा सुनासा वरप्रदा।शारदा ब्राह्मी सुभद्रा श्रीप्रदा।भारती त्रिगुणा शिवा वागीश्वरी।गोमती कांता परा भुवनेश्वरी॥पुण्य इस भारत धरा पर ध्यान दे…॥ शारदे यश विद्या बुद्धि ज्ञान दे।माँ तनिक भी मत हमें अभिमान दे॥ ज्ञानमुद्रा पीत … Read more

सुनो कन्हैया

कुमकुम कुमारी ‘काव्याकृति’मुंगेर (बिहार)********************************************** रचनाशिल्प:छंद शास्त्र के अनुसार तंत्री छंद ३२ मात्राओं का सम-मात्रिक छंद है, जिसमें ८, ८, ६, १० मात्रा पर यति का विधान है तथा ८, ८ पर अंत्यानुप्रास होना चाहिए। पदांत में गुरु गुरु (२२) आवश्यक है।सभी छंदों की तरह इसमें भी ४ पद होते हैं। २-२ पद अथवा चारों पद … Read more

राम भजो, यह धर्म

डॉ.एन.के. सेठी ‘नवल’बांदीकुई (राजस्थान) ********************************************* राम भजो सब काम तजो यह धर्म है।मानव जीवन मुक्ति यही सब मर्म है॥जो करता शुभकर्म उसे सुख प्राप्त हो।जीवन के पथ पे न कभी वह भ्रांत हो॥ राम सदा जग के दु:ख खेवनहार हैं।राम सभी जन को करते भव पार हैं॥राम बसे सबके हिय में यह सत्य है।आकर वे … Read more

विकल्प छंद

बाबूलाल शर्मासिकंदरा(राजस्थान)****************************************** रचनाशिल्प:१८ वर्ण प्रति चरण, ४ चरण, दो-दो समतुकांत हो, ८-१० वर्ण पर यति अनिवार्य है। सगण सगण सगण सगण सगण सगण ११२ ११२ ११२ ११२ ११२ ११२ छलिया कलिका रस, पान करे फिरते भँवरे।द्रुम में तितली बस, ढूँढ रही रस के कतरे।तरु में नर कोकिल, कूँजत पीव मिले मन से।नर के मन में … Read more

माँ ब्रह्मचारिणी परेशानी हरो

अजय जैन ‘विकल्प’इंदौर(मध्यप्रदेश)****************************************** ‘ब्रह्मचारिणी’,तप ज्योतिध्यान का रूप,सत्य धूपसृष्टि। ‘ब्रह्मचारिणी’,संयम-साधनासृष्टि की मूरत,एकाग्रता शक्तिविश्वास। ‘ब्रह्मचारिणी’,नियम-ध्यानभक्ति हो तुम,निरंतर तपपहचान। ‘ब्रह्मचारिणी’,कठिन राहेंतुम्हारा आशीर्वाद उजियारा,तप फलसीख। ‘ब्रह्मचारिणी’,जीवन संघर्षमाँ परेशानी हरो,धैर्य टूटताश्रद्धा॥

पावन ये धरती

डॉ.एन.के. सेठीबांदीकुई (राजस्थान) ********************************************* रचनाशिल्प: मापनीयुक्त वर्णिक, ८ वर्ण, मापनी-गालल गालल गागा २११ २११ २२, पिंगल सूत्र-भ भ ग ग, ध्रुव शब्द-जाता, २ २ चरण या चारों चरण समतुकांत भारत देश हमारा।है हमको यह प्यारा।पावन ये धरती है।कष्ट सभी हरती है। जन्म यहाॅं जन पाता।व्यर्थ न जीवन जाता।त्याग यहाॅं जन में है।दुःख न जीवन में … Read more

मंजिल ने तुम्हें पुकारा

डॉ. गायत्री शर्मा’प्रीत’इन्दौर (मध्यप्रदेश )******************************************* आगे कदम बढ़ाते जाओ, मंजिल ने तुम्हें पुकारा।सीमाओं पर पहरा देता, सैनिक है सबसे न्यारा॥ ऊँचे शिखर की स्वर लहरी, अब गीत खुशी के गाये,करते हैं वे देश की रक्षा, युद्ध भूमि में जब जाये।अतुलित बल देखा जब इनका, गर्व करें यह जग सारा,आगे कदम बढ़ाते जाओ, मंजिल ने तुम्हें … Read more

चलो मनाएं आदिवासी दिवस

डॉ.आशा आजाद ‘कृति’कोरबा (छत्तीसगढ़)**************************************** चलो मनाएँ आज, आदिवासी शुभ दिन को।मूल निवासी शान, नमन हर मानव जन को॥वेद पुरातन ग्रंथ, आत्विका इनको कहते।कला धरें भंडार, मगर गाँवों में रहते॥मूल यहाँ जनजातियाँ, हल्बा भतरा गोंड़ है।प्रेम हृदय बसता सदा, कला श्रेष्ठ बेजोड़ है॥ संविधान में दर्ज, स्थान जनजाति लिखाया।बाइस भाषा नाम, आठवें क्रम में आया॥कलाशिल्प है … Read more