महा दुर्ग चित्तौड़

बाबूलाल शर्मासिकंदरा(राजस्थान)****************************************** मापनी आधारित एकलिंग छंद (दण्डक) विधान, रचनाशिल्प-४६ मात्रा, प्रति चरण ४ चरण, २-२ समतुकांत हो, १२, २४, ३५, ४६ वीं मात्रा पर यति अनिवार्य है। चरणांत गुरु (२) अनिवार्य है। गुहिल वंश मेवाड़ी, लड़ते युद्ध अगाड़ी,एक लिंग दरबान, मानते माँ धरती। सिसोदिया कहलाए, जन मेवाड़ी भाए,महा दुर्ग चित्तौड़, देख आँखें भरती। योद्धा थे … Read more

किससे कहें, कौन सुनेगा…?

ममता तिवारी ‘ममता’जांजगीर-चाम्पा(छत्तीसगढ़)******************************************** पल-पल शोर करे जियरा फिर भी हम तो थिर मौन रहे,हलचल भीतर में अति लेकिन छोड़ हटा, अब कौन कहे ? लिख-लिख कागद स्याह हुआ मन पृष्ठ सभी पर रिक्त रहा,मिलकर चोट दिया सबने अपने यह कारज लिप्त रहा,बुझ थक-हार गए सब मारुत, दीपक आश रहा जलता,बिखर गए ठस पत्थर लोग मृदा … Read more

पहले मतदान, फिर जलपान

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* देखो तो चुनाव है आया, करें सभी मतदान।पहले अपना कर्म निभाएँ, फिर ही हो जलपान॥ अब चुनाव तो पावन आया, जाएँ सब ही जाग।रखना सबको वोटिंग के प्रति, सतत गहन अनुराग॥ निर्वाचन का शंख बजा है, बेशक़ीमती वोट।अपना कर्म नहीं कर पाए, तो ख़ुद पर ही चोट॥ चलो उठो सबको है … Read more

दारुण जन

डॉ.आशा आजाद ‘कृति’कोरबा (छत्तीसगढ़)**************************************** दारुण जन के पीर पर, सदा लगाए मर्म।मानवता की राह पर, श्रेष्ठ यही है धर्म॥श्रेष्ठ यही है धर्म, हृदय से सोचें उत्तम।दु:ख पीड़ा को देख, लगावें मिल-जुल मरहम॥पुण्य करें सब काज, हृदय में धारें सतगुण।मानव कभी न होय, हृदय मन से भी दारुण॥ दारुण मन से हो नहीं, हृदय भरा हो … Read more

रंगों का मोल

डॉ.आशा आजाद ‘कृति’कोरबा (छत्तीसगढ़)**************************************** कुदरत का वरदान शुभे है, जिसको कहते रंग।अन्तर्मन को शोभित करती, लाती सदा उमंग॥ अट्ठारह इकसठ में जानें, मैक्सवेल की खोज।शुभ वर्णों की बारीकी, खोजा उसने रोज॥ श्वेत-श्याम बस रंग प्रथम थे, नित्य रंगते चित्र।वर्तमान में रंग अलौकिक, अब ये जीवन मित्र॥ मोनोक्रोम प्रथम था पहले, बढ़ी रंग पहचान।मूल रंग दुनिया … Read more

जनहित ध्येय हो

डॉ.आशा आजाद ‘कृति’कोरबा (छत्तीसगढ़)**************************************** सच्चा मानुष है वही, सबको समझे एक।देश के उत्थान में, कर्म करे वह नेक॥कर्म करे वह, नेक देशहित, फर्ज निभाए।दीन-दुखी के, कष्ट हरे नित, समता लाए॥‘आशा’ कहती, जनहित गाए, बच्चा बच्चा।कभी न हारे, निडर मनुज ही, होता सच्चा॥ लेखन शैली नेक हो, जनहित की हो चाह।कवि की रचना ज्ञान दे, ऐसी … Read more

नया वर्ष आया, खुशियाॅं लाया

हीरा सिंह चाहिल ‘बिल्ले’बिलासपुर (छत्तीसगढ़)********************************************* रचनाशिल्प:१६-१४ के क्रम में ४ चरण प्रति छंद में कुल ३० मात्राएं, अनिवार्य रूप से चरणान्त में ‘मगण (sss) ३ गुरु वर्ण (२२२) का प्रयोग। नया वर्ष भारत का आया।खुशियाॅं साथ सजा लाया॥पर्व गुड़ी पड़वा ये भाया।इसका सुख सबने पाया॥ आओ गीत खुशी के गाएं।गीतों से खुशियाॅं पाएं॥साथ सभी के … Read more

स्वर्ग -नर्क कहाँ है

डॉ.आशा आजाद ‘कृति’कोरबा (छत्तीसगढ़)**************************************** स्वर्ग कहाँ है कौन जानता, कहाँ रहे है नर्क।मानव सत से रहे परे अरु, व्यर्थ लगाता तर्क॥ कौन भला मृत देह बाद में, लौटा वापस आज।नर्क-स्वर्ग की कहे कहानी, खोला जिसने राज॥ स्वर्ग लोक की बात बताए, कैसा रहता हाल।नर्क लोक में क्या-क्या होता, कौन बताए चाल॥ कैसा है यमराज लोक … Read more

रंग… मिलन

अजय जैन ‘विकल्प’इंदौर(मध्यप्रदेश)****************************************** होली विशेष…. ‘होली’,मन मस्तीरंग की तरंग,मिलन बहानाखुशी। संस्कृति,सिखाती सबकोमिलकर पर्व मनाएँ,घुल जाएँरंग। सौहार्द,है त्यौहारस्नेह का उजाला,रहना सदामस्त। जीवन,बड़ा कठिनरंगीन होना पड़ेगा,उल्लास जरूरीमनोरंजन। उत्सव,जीवन रंगआनंद नहीं तो,सब फीकाबेरंग। खिलखिलाहट,चाहिए हमेंरंग है प्रतीक,जोड़ते हमेंमन। सद्भावना,बढ़ाते रंगइन बिन नीरसता,होती सदाजंग। होली,पर्व उल्लासकरें कामना हम,बिखरे सदाप्रसन्नता। होली,मतलब पवित्रताहर रंग अनूठा,देता सीखमिलन। परम्पराएँ,हमारी विरासतइनको सहेजना है,रंग जैसेअनूठे॥

शिव जी सदा जग पालक

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* जय देव सदा जग-पालक हैं।हम तो शिवजी! बस याचक हैं॥करना करुणा नहिं लायक हैं।हम तो शिवजी! गुण गायक हैं॥ प्रभुजी शिव! के हम दास सदा।हम तो चरणों पर ख़ास सदा॥हम रंग रँगे उर वास सदा।शिवजी! हमको अहसास सदा॥ शिव जी! तुम तो ममतामय हो।शिव जी! तुम तो गति औ’ लय हो॥शिव … Read more