तपती धरती है दिवा

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* तपिश धूप वैशाख की, कहर ढाहता लोक।सूख रही धरती सरित, गर्मी बनती शोक॥ वन गिरि नद कर्तन धरा, निरत प्रकृति संहार।देख ग्रीष्म शुरुआत में, वर्षाता अंगार॥ तपती धरती है दिवा, बरस रहा घन रात।मौसम करवट बदलती, ताप वृष्टि आघात॥ लोभ ग्रसित मानव चरित, भौतिकता में अंध।काट रहे हैं पेड़ … Read more

धर्म-संरक्षक देव

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* परशुराम जयंती (३० अप्रैल) विशेष… विष्णुदेव के दिव्यतम, थे छठवें अवतार।परशुराम जी को नमन्, रचा धर्म का सार॥ मातु रेणुका लाल थे, जमदग्नि मुनि के ताप।संहारा नित पाप को, हरा सकल अभिशाप॥ भग्न हुआ शिव का धनुष, परशुराम जी क्लांत।पर प्रभु रघुवर का विनय, देव हुए तब शांत॥ मार अधर्मी यह … Read more

गुरु-गुरुकुल परम्परा

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* गुरु गुरुकुल की परम्परा, गरिमा गुणी गुरुत्व।गुणातीत गुरु ब्रह्म सम, अखिलानंद महत्व॥ मर्यादित जन आचरण, परम्परा कुल शान।संस्कार कौशिक समझ, स्वाभिमान सम्मान॥ परम्परा रक्षण प्रथम, राष्ट्र धर्म कर्त्तव्य।सदाचार संस्कृति सुपथ, गमनागम ध्यातव्य॥ मातृशक्ति आदर सतत, परम्परा इस देश।करुणा ममता सृष्टिजा, रीति प्रीति परिवेश॥ मातु पिता गुरु अतिथि का, देवतुल्य … Read more

पुस्तक दूर करे अज्ञान

डॉ.एन.के. सेठी ‘नवल’बांदीकुई (राजस्थान) ********************************************* ‘क्या अच्छी दोस्त…? (विश्व पुस्तक दिवस विशेष)… पढ़कर पुस्तक को सभी, दूर करें अज्ञान।सबसे अच्छा मित्र भी, पुस्तक को ही जान॥ पढ़कर सत्साहित्य को, बने सभी विद्वान।ज्ञानी बनकर ज्ञान से, पाएं जग में मान॥ ग्रन्थ रत्न अनमोल हैं, मिलता इनसे ज्ञान।पढ़कर इनको हम सभी, बनते हैं विद्वान॥ पढ़ें ग्रन्थ अध्यात्म … Read more

पुस्तक है उजियार

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* ‘क्या अच्छी दोस्त…? (विश्व पुस्तक दिवस विशेष)… वाहक पुस्तक सत्य की, पुस्तक है उजियार।पुस्तक ने इस लोक से, किया परे अँधियार॥ पुस्तक देती चेतना, नया सोच दे नित्य।पुस्तक को मानें सभी, जैसे हो आदित्य॥ पुस्तक अनुशासन रचे, संस्कार की धूप।जो पुस्तक को पूजता, पाता तेजस रूप॥ पुस्तक गढ़े चरित्र को, पुस्तक … Read more

पृथ्वी माँ करुणामयी

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* ‘विश्व पृथ्वी दिवस’ विशेष… हरित भरित सुष्मित प्रकृति चारु,नद गिरि निर्झर सिन्धु समझ लोपशु विहंग धरती भरी पड़ी,अनल अनिल नभ बन्धु समझ लो। नवांकुरित नवपौध धरा चहुँ,नवकिसलय नवपात समझ लोकुसमित सुरभित हो फलित वृक्ष,निर्मल बहता वात समझ लो। झील नील सागर विमल सलिल,विलसित भू आकाश समझ लोनवजीवन संचार धरा … Read more

ध्यान धरो राधारमण

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* राधे राधे भज मनुज, कृष्णायन अविराम।ध्यान धरो राधारमण, भज लो राधेश्याम॥ मन विकार तम मन मिटे, राधे राधे नाम।अन्तर्मन नवशक्ति दे, माधव मन अभिराम॥ राधे सुमिरन भोर में, मिले शान्ति सुख योग।खिले कृष्ण मकरंद मन, मिटे स्वार्थ तम रोग॥ राधामय हिय भक्ति रस, राधे राधे गान।मुख मुकुन्द मुकुलित मधुर, … Read more

तारीफ़ औषधि

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* आए जितनी आपदा, सहे सकल अवमान।तनिक तारीफें क्या मिली, खिलें होंठ मुस्कान॥ निर्बलता विचलित मना, उदासीन प्रतिमान।सहज सरल संघर्ष में, तारीफ़ औषधि मान॥ हेतु बने उपहास का, करें स्वयं तारीफ़।सहन नहीं आलोचना, सहे सहज तकलीफ़॥ बची गात्र बस हड्डियाँ, भूख प्यास बिन वास।खुला व्योम क्षत वसन है, तारीफ़ें उपहास॥ … Read more

शब्दों का मेला

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* शब्द-शब्द है चेतना, शब्द-शब्द झंकार।मिले सृष्टि को जागरण, शब्द रचें आकार॥ शब्द विश्व का रूप है, शब्द बने उजियार।शब्द उच्च उर्जा लिए, मेटे हर अँधियार॥ शब्द ब्रम्ह हैं, ईश हैं, शब्द सकल ब्रम्हांड।शब्द रचें अध्याय नित, मानस के सब कांड॥ शब्द तत्व हैं, सार हैं, शब्द सृजन अभिराम।शब्द सतत गतिशील हैं, … Read more

टूट रहे समरस वतन

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* तुले तोड़ने चल पड़े, देश धर्म सद्भाव।ताल बजाते देख जन, काम क्रोथ मद घाव॥ टूट रहे समरस वतन, भाषा जाति समाज।कहाँ परस्पर मेल अब, कलह द्वेष आगाज॥ गहराती गर्मी कहर, लू बरसाता ताप।कहीं मौत बन आँधियाँ, कहीं गहन बरसात॥ कीचड़ में खिलते कमल, सहतेक्ष बहु दुर्गन्ध।धर्म जाति संघर्ष में, … Read more