पत्थर की महिमा
प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* रहना पत्थर बन नहीं, बन जाना तुम मोम।मानवता को धारकर, पुलकित कर हर रोम॥ पत्थर दिल होते जटिल, खो देते हैं भाव।उनमें बचता ही नहीं, मानवता प्रति ताव॥ पत्थर की तासीर है, रहना नित्य कठोर।करुणा बिन मौसम सदा, हो जाता घनघोर॥ पत्थर जब सिर पर पड़े, बहने लगता ख़ून।दर्द बढ़ाता नित्य … Read more