महको कमल बन
डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* कीचड़ में खिलता कमल, सुरभित करता लोक।शोभित कर हरि लक्ष्मी, कर्म कीर्ति आलोक॥ मिले गर्त उपहास बहु, फँसें नहीं खल फाँस।खिलें विवेकी अरुणिमा, सुमति किरण बन खास॥ बाधाओं से पथ घिरा, राह मिले पाषाण।समझ गर्त इस द्वेष को, निकल जगत कल्याण॥ घायल होंगे गात्र भी, बढ़ो लक्ष्य पथ त्राण।तोड़ो … Read more