संविधान दर्पण वतन

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* अनुशासित जीवन मनुज, संस्कार व्यवहार।अटल धेय संकल्प श्रम, दर्पण है संसार॥ मानवीय संवेदना, नीति-प्रीति आचार।शील धीर मितभाषिता, जीवन का श्रृंगार॥ मति विवेक संयम सुपथ, साहसपूर्ण चरित्र।सहनशील समरस हृदय, रिश्ते बनें पवित्र॥ हमदर्दी परवेदना, व्यथा बोध हो चित्त।मिटे उदासी व्यथित जन, बदले जीवनवृत्त॥ मातु-पिता गुरु श्रेष्ठजन, नित सेवा हो धर्म।सौन्दर्य … Read more

हो मधुरिम जीवन

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* हो मधुरिम जीवन सुखद, सदा सत्य व्यवहार।प्रेम नीति करुणा हृदय, वसुधा ही परिवार॥ धर्म जाति भाषा पृथक्, संस्कृति विविध विचार।किन्तु एक भारत वतन, प्रेम शान्ति सुखसार॥ मन सुन्दर सुन्दर जगत, शील त्याग गुण मान।सत्प्रयास पौरुष सफल, नभ उन्मुक्त उड़ान॥ वैर घृणा मन न कभी, रहें धीर गंभीर।विघ्न जटिल संघर्ष … Read more

शिव जीवन आधार

बोधन राम निषाद ‘राज’ कबीरधाम (छत्तीसगढ़)************************************************ श्री शिवाय नमस्तुभ्यम… महादेव श्री शम्भु शिव, है जीवन आधार।चरणों में इनके टिका, ये सारा संसार॥ अपने जो आराध्य का, करते हैं नित ध्यान।देवों के इस देव का, कैसे करूँ बखान॥ मृग छाला तन शोभते, चन्द्र विराजे भाल।गंगा जिनके शीश पर, भोले दीन दयाल॥ मेरे मन की कामना, कहता हूँ … Read more

जल से जीवन

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* जल से जीवन है जगत, जीवन है आधार।चलो बचाएँ आज मिल, कुदरत जल उपहार॥ जल जीवन का संचरण, ईश्वर का वरदान।रखें स्वच्छ निर्मल सलिल, बचे तभी जग जान॥ गिरि नद निर्झर अरु सरित, स्वच्छ रखें जलस्रोत।सिंचित धरती श्यामला, उपजाऊ बन जोत॥ प्रतिबंधित हो कर्तना, गिरि नद तरु वन पाद।रक्षण … Read more

रचो गान भारत विजय

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* करूँ आरती भारती, रचूँ काव्य जयगान।रखूँ हृदय गौरव वतन, पौरुष पथ उत्थान॥ कुछ कृतघ्न भारत मनुज, चाहत दौलत अन्ध।काट रहा ख़ुद कोख को, फैलाता दुर्गन्ध॥ कहाँ सोच अब राष्ट्र हित, कहाँ योग परमार्थ।कहाँ भान निज संस्कृति, बोध कहाँ धर्मार्थ॥ पर्वत नदियाँ वृक्ष बन, नित कर्तन आघात।कुपित प्रकृति सूरज किरण, … Read more

नेता और कुर्सी

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* नेता कुर्सी पर लदा, सुख का करता भोग।नेता जन के तंत्र का, बहुत बड़ा है रोग॥ नेता से वादे झरें, बाहर आता झूठ।खड़ा हुआ है नीति का, केवल अब तो ठूँठ॥ नेता नाटक नित करे, बने संत का बाप।छिनती कुर्सी तब ‘शरद’, छिन जाता सब ताप॥ नेता लोभी, स्वार्थमय, कपटी अरु … Read more

क्या जाएगा साथ

बोधन राम निषाद ‘राज’ कबीरधाम (छत्तीसगढ़)************************************************ श्री शिवाय नमस्तुभ्यम… नश्वर इस संसार से, क्या जायेगा साथ।शिव से रिश्ता जोड़िये, सदा झुकाकर माथ॥ औघड़दानी शम्भु शिव, लेते हैं जो नाम।काम सफल होते सभी, पाते हैं सुखधाम॥ संकट से रक्षा करें, शम्भु- शिवा सुखधाम।परम् पिता संसार के, जप लो इसका नाम॥ जपते जो शिव नाम को, उनका बेड़ा … Read more

धरती जैसे आग

डॉ.एन.के. सेठीबांदीकुई (राजस्थान) ********************************************* बढ़ा ग्रीष्म का ताप अब, हाल हुआ बेहाल।झुलस रहे हैं जीव सब, सूख गए सब ताल॥ गर्म तवे-सी तप रही, सूखे वृक्ष तडाग।सूरज भी तड़पा रहा, धरती जैसे आग॥ वन्य जीव तड़पे सभी, ढूंढ रहे हैं छाॅंव।गरमी में खग-वृंद भी, नहीं टिकाते पाॅंव॥ गरम-गरम लू चल रही, मिले नहीं अब चैन।स्वेद … Read more

भक्ति जगा दो

बोधन राम निषाद ‘राज’ कबीरधाम (छत्तीसगढ़)************************************************ श्री शिवाय नमस्तुभ्यम… भक्ति जगा दो शंभु शिव, जीवन होवे धन्य।घट-घट वासी आप है, बना हमें चैतन्य॥ निभा सकूँ निज धर्म को, देना मुझको ज्ञान।कहे ‘विनायक’ आपसे, भोले कृपा निधान॥ रामेश्वर रामेश्वरम्, दर्शन सुबह व शाम।भोले मैं सुमिरन करूँ, कृपा सिंधु सुखधाम॥ अर्ज हमारी सुन प्रभो, करो कृपा बरसात।कहे ‘विनायक’ … Read more

नैतिकता का ज्ञान

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* कहाँ बोध पुरुषार्थ का, नैतिकता का ज्ञान।बचा कहाँ संकोच अब, कहाँ अर्थ सम्मान॥ सूचक समझो अधपतन, अहंकार पद मोह।कदम बढ़े क्रोधाग्नि पथ, सत्ता पद अवरोह॥ लालच है ऐसी बला, होता कुटिल स्वभाव।खल चाहत रत छल कपट, खतरों को दे घाव॥ खिले अधर खुशियाँ कली, महके पुष्प पराग।पौरुष परहित सुयश … Read more