मन के रावण का संहार करो

डॉ. गायत्री शर्मा ’प्रीत’इन्दौर (मध्यप्रदेश )******************************************* मन के रावण का करो, तुम पहले संहार।तब ही मिल पाये हमें, इस जीवन का सार॥ गली-गली रावण बना, राम करो उद्धार।मातु-बहन-बेटी यहाँ, होता रहा प्रहार॥ मायावी राक्षस बने, करते हैं प्रतिघात।सुख का सूरज है नहीं, आई दुख की रात॥ रावण जलने की सदा, चलती आई रीत।मन का रावण … Read more

बस करो जलाना पुतले को…

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* दशहरा विशेष…. अपराध बोध माना हियतल,दुष्काम काम घायल था मैंअभिशप्त अहं आज्ञापालक,गोलोक द्वार राजित था मैं। सनक सनन्दक महर्षि कोप,त्रिजन्म असुर था मैं शापितआसुरी गुणी भूले सद्गुण,बस चतुर्युगी जलता हूँ मैं। मैं महातपस्वी शौर्यवीर,त्रिलोक जेता दुर्जयी था मैंबस सत्ता पद अहंकार अनल,अत्याचार निर्दयी था मैं। पुरुषार्थ सबल साधक ईश्वर,दशानन … Read more

महाष्टमी:माँ महागौरी देवी

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* नवराता आराधना, नवदुर्गा नवरूप।आदिशक्ति दुर्गाष्टमी, दर्शन दिव्य अनूप॥ वंदन जगदम्बा चरण, वैदिक विधि उपचार।रिद्धि सिद्धि निधि नव विधा, सिद्धि दातृ उपहार॥ जवाकुसुम अपराजिता, गेंदा सुंदर फूल।बेलपात तृण दूर्व दल, रुचिकर माँ अनुकूल॥ पूजन माँ जगदम्बिका, महागौरी स्वरूप।श्रद्धा भक्ति चिन्तना, महिमा अम्ब अनूप॥ माता रानी अर्चना, करें मिटे दुर्भाव।धूप दीप … Read more

मनुज प्रकृति उपवन सम

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* मनुज प्रकृति उपवन समा, श्री वर्धन तरु ज्ञान।सुदृढ़ पादप चरित हो, मानक कीर्ति बखान॥ मजबूती देती तना, शाखाओं विस्तार।शील धीर त्यागी विनत, रीति नीति आधार॥ हरित भरित किसलय ललित, पत्ती ऊर्जावान।संस्कार परिवार से, क्षमा दया मतिमान॥ सावन बरखा आगमन, हरियाली उद्यान।खिलती कलियाँ कुसुम बन, सुरभित सम मुस्कान॥ फलदायी पुरुषार्थ … Read more

माँ चंद्रघंटा देवी अवतरण

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* मातु चन्द्रघंटा शिवा, तृतीय दिवस महान।सिंहवाहिनी चन्द्रिके, महिमा मंडन गान॥ महिषासुर आतंक से, देवलोक भयभीत।देवों ने मांगी मदद, विधि शिव विष्णु विनीत॥ पीड़ कथा सुन देव की, त्रिदेव हुए अतिक्रुद्ध।त्रिदेव तेज उर्जा प्रकट, देवी अनुपम शुद्ध॥ अर्धचन्द्र माँ भाल पर, शुभ घण्टा आकार।माँ चंद्रघण्टा अवतरण,महिषासुर संहार॥ शिव त्रिशूल हरि … Read more

ईश्वर तुम रुष्ट हो

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* बहुत हुई इस बार तो, मानसून की मार।इंसानों की बस्तियाँ, गईं आज हैं हार॥ दिया प्रकृति ने देश को, चोखा इक संदेश।छेड़-छाड़ हो प्रकृति से, तो भोगो आवेश॥ बिगड़े किंचित संतुलन, तो होगा आघात।मौन संदेशा प्रकृति का, सौंप रहा जज़्बात॥ मानसून की मार का, रहा न कोई छोर।घबराये इंसान सब, पीड़ित … Read more

अभियन्ता प्रथम

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* हुआ जन्म संक्रान्ति में, कन्या भाद्र दिनांक।ब्रह्मा विश्वकर्मा पिता, अन्तिम दिन शुभांक॥ वसु प्रभास के आत्मज, योगसिद्ध सन्तान।कथा महाभारत विदित, हरिवंशी आख्यान॥ दुनिया अभियन्ता प्रथम, शिल्पकार संसार।देवलोक यांत्रिक प्रभो, महिमा अपरम्पार॥ नमन देव शिल्पी प्रभो, निर्माता संसार।सकल चराचर भूतगण, जीवन सुख आधार॥ वैज्ञानिक विज्ञान के, सकल यंत्र निर्माण।रची अलौकिक … Read more

हिन्दी हिन्दुस्तान की पहचान

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* मातृभाषा हिन्दी बहुल, विलसित देश-विदेश।लोकतंत्र जन भावना, समरसता संदेश॥ हिन्दी हिन्दुस्तान की, आजादी पहचान।सब जन सब हित जोड़ती, राष्ट्र भक्ति जय गान॥ वैज्ञानिक भाषा सहज, व्याकरणिक परिमार्य।राष्ट्र राजभाषा मधुर, बोधगम्य स्वीकार्य॥ हिन्दी में बोली विविध, संस्कृतियों का मेल।भारत संघी एकता, नवरस गुण गठमेल॥ अति विशाल हिन्दी परिधि, अनुपमेय साहित्य।गद्य-पद्य … Read more

पीपल की सेवा

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* वृक्षों में तरु श्रेष्ठतर, पीपल विष्णु निवास।भक्ति भाव पूजन करें, हो धन सुख यश पास॥ पीपल तरु पावन धरा, पूजें नित शनिवार।मिले सफलता ज़िंदगी, सब दुख से उद्धार॥ पीपल तरु सेवा सतत, हो कठिनाई दूर।दीप धूप जल अर्घ्य से, हों शनि मुदित जरूर॥ बरसे शनि की बहु कृपा, सकल … Read more

बाढ़ बनी कहर

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* बरसाती मौसम कहर, ढाया है आषाढ़।भारत चहुँ सागर बना, सर्व विनाशी बाढ़॥ धन जन पशु घर सब बहे, भीषण जल सैलाब।आहत राहत याचना, जनता है बेताब॥ बाढ़-आंधियाँ साथ में, बिजली का आघात।जान माल बलि ले गई, निर्मम यह बरसात॥ कहीं मेघ वरदान है, कहीं बाढ़ बन काल।बही प्रजा जलधार … Read more