भूल गए औकात
डॉ.सरला सिंह`स्निग्धा`दिल्ली************************************** भूल गए औकात हैं, पाकर थोड़ा ज्ञान।अपनों को भी भूलते, करें अमित अभिमान॥ भूल गए औकात वे, भूली पिछली बात।छाया दौलत का नशा, डूबे हैं दिन रात॥ भूल गए औकात हैं, भूल गए सत्कर्म।जीवन के दिन चार बस, जान सके कब मर्म॥ भूल गए औकात वे, रावण के भी बाप।अहित सदा सबका करें, … Read more