माता की चिट्ठी

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश) ******************************************* माँ अनमोल रिश्ता (मातृ दिवस विशेष) … माता की चिट्ठी मिली,झंकृत उर के तार।लगता मुझको मिल गया,यह पूरा संसार॥ माता की चिट्ठी सुखद,जो लगती उपहार।माता के बस नाम से,खिल जाता उजियार॥ माता की चिट्ठी रचे,पावन इक विश्वास।माता का तो नाम भर,है नेहिल अहसास॥ चिट्ठी माँ की दे रही,मुझे असीमित प्यार।लेकर … Read more

माँ मेरी प्रेरणा

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) *********************************************** ममता करुणा हृदय तल, स्नेह सुधा उर पान।माँ जननी धरती समा, तू जीवन वरदान॥ क्षमा दया जीवन कला, तू जीवन सुख छाँव।सुख दुख आपद रक्षिका, अश्क नैन लखि घाव॥ सहनशीलता परिधि माँ, जीती बस सन्तान।सर गम को पीती स्वयं, रखे पूत सुख मान॥ गंगा सम पावन हृदय, स्नेह सलिल … Read more

परिवर्तन होता सदा

डॉ.धारा बल्लभ पाण्डेय’आलोक’अल्मोड़ा(उत्तराखंड) *************************************** पल-पल चलता ही रहे, कालचक्र गतिमान।कभी रहे ना एक क्षण,अचल सृष्टि प्रतिमान॥ परिवर्तन होता सदा, प्रकृति और संसार।कभी यहाँ पतझड़ रहे, कभी वसंत बहार॥ कभी ऊष्णता ग्रीष्म की, तो सावन जलधार।कभी शीत में ठिठुरती, ठंडी शीत बयार॥ बदलेगी दुनिया जहां, होंगे यह बदलाव।सभी पुराना बीतकर, आयें नव बदलाव॥ नई सृष्टि नवचेतना, … Read more

टूटे जब विश्वास…

अब्दुल हमीद इदरीसी ‘हमीद कानपुरी’कानपुर(उत्तर प्रदेश)********************************************* जनता का हक़ मार कर, सजवाते दरबार।सत्ता में आते नहीं, कभी दूसरी बार। जिनके ज़हनों में बसा, नफरत का शैतान।उनको कह सकते नहीं, हरगिज़ हम इन्सान। मानवता की चीख सुन, शासक रहता मौन।आग लगाकर खुश बहुत, धरती का फिरऔन। किसी व्यक्ति से चाहते, रखते जब कुछ आस।पूरा होता जब … Read more

हमारी धरोहर

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश) ******************************************* खड़े भवन जो आज भी,कहते वे इतिहास।कला-विरासत को लिए,देते सुख-अहसास॥ दिखती जिनमें श्रेष्ठता,होता गौरव-बोध।ढूँढ़-ढूँढ़कर कर रहे,पढ़ने वाले शोध॥ कहीं महल,तो दुर्ग हैं,मंदिर-मस्जिद रूप।खंडहरों में हैं छिपी,बीते युग की धूप॥ नालंदा की भव्यता,संस्कार का नूर।विश्वगुरू हम थे प्रखर,विद्या से भरपूर॥ कितना स्वर्णिम था कभी,जानें आप,अतीत।उसने यश,गौरव रचा,गया ‘शरद’ जो बीत॥ खंडहरों … Read more

धरती माँ करुणामयी

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश) ******************************************* पृथ्वी दिवस विशेष…. धरती माता पालती,संतति हमको जान।धरती माता के लिए,बेहद है सम्मान॥ अवनि लुटाती नेह नित,करुणा का प्रतिरूप।इसकी पावन गोद में,सूरज जैसी धूप॥ वसुधा का संसार तो,बाँटे सुख हर हाल।हवा,नीर,भोजन,दुआ,पा हम मालामाल॥ धरा-गोद में बैठकर,होते सभी निहाल।मैदां,गिरि,जंगल सघन,सुख को करें बहाल॥ हरियाली के गीत नित,गाती वसुधा ख़ूब।हम सबको आनंद … Read more

किया ज्ञान का मान

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश) ******************************************* महावीर जयंती विशेष… महावीर भगवान ने,किया ज्ञान का मान।सत्य,अहिंसा बन गये,हम सबकी पहचान॥ महावीर जी चेतना,एक अटल विश्वास।महावीर जी शान थे,जन-जन की नित आस॥ महावीर जी थे प्रखर,हम सबका अभिमान।नैतिकता का कर सृजन,किया सतत् उत्थान॥ महावीर जी कर्म थे,पूरे अनुसंधान।महावीर जी धर्महित,मानवता के प्राण॥ महावीर जी ने किया,नवल एक उद्घोष।महावीर … Read more

बाबा साहब बन गए सबकी पहचान

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश) ******************************************* डॉ.आम्बेडकर जयंती विशेष… बाबा साहब ने दिया,हमको प्रखर विधान।बाबा साहब बन गये,हम सबकी पहचान॥ बाबा साहब चेतना,एक अटल विश्वास।बाबा साहब शान थे,जन-जन की आस॥ बाबा साहब मान थे,हम सबका अभिमान।संविधान का कर सृजन,किया सतत् उत्थान॥ बाबा साहब कर्म थे,पूरे अनुसंधान।बाबा साहब देशहित,मानवता के प्राण॥ बाबा साहब ने किया,नवल एक उद्घोष।बाबा … Read more

करो नाश खल

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ********************************************* जय गौरी जगदम्बिके,दुर्गति हर तू लोक।नवदुर्गे हर पाप जन,रोग शोक तम शोक॥ अष्ट सिद्धि नौ निधि जगत,दात्री तू जगदम्ब।क्षमा शील करुणामयी,मुक्ति मार्ग अवलम्ब॥ माता रुद्राणी शुभा,वृषवाहन आरोह।महातिमिर हर मातु हिय,भवसागर मद मोह॥ देवासुर नर पूज्य नित,हिमजा गौरव मान।जगजननी रम्या शिवे,दे भक्ति प्रेम सम्मान॥ जगतारिणि अम्बे कृपा,करो मनुज कल्याण।कोरोना से … Read more

माँ दर्शन दो,करो निहाल

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश) ******************************************* नवरात्रि विशेष…. दुर्गा माँ तुम आ गईं,हरने को हर पाप।संभव सब कुछ आपको,तेरा अतुलित ताप॥ बढ़ता ही अब जा रहा,जग में नित अँधियार।फैला दो माँ वेग से,तुम अब फिर उजियार॥ भटका है हर आदमी,बना हुआ हैवान।हे माँ! दे दो तो ज़रा,तुम विवेक का मान॥ सद्चिंतन तजकर हुआ,मानव गरिमाहीन।दुर्गा माँ दुर्गुण … Read more