युवा वर्ग ही बचाए धरती को

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ प्यार की धरा जहां लगातार प्रभावित होती रहती है, सत्य, अहिंसा, त्याग व दया की नींव पर मानव अपने सिर को ऊँचा करके चलता है। जहां पशु-पक्षियों तथा अन्य प्राणियों की रक्षा व उनकी सुरक्षा करना हम सभी के धर्म में लिखा है, वहीं भारतीय संस्कृति व सभ्यता की अनमोल … Read more

अंतर है तंत्र, मंत्र और तत्व ज्ञान में

हेमराज ठाकुरमंडी (हिमाचल प्रदेश)***************************************** बहुतायत लोगों की यह धारणा होती है कि तंत्र, मंत्र और तत्व ज्ञान- ये तीनों एक ही विषय के अलग-अलग नाम हैं, किंतु वास्तव में ऐसा नहीं है। अध्यात्म-विज्ञान की दृष्टि से देखें तो ये अलग-अलग पड़ाव हैं। प्रत्येक का अपना क्षेत्र, उद्देश्य और लक्ष्य है। इन्हें क्रमवार समझना आवश्यक है:-🔹तंत्र … Read more

जब समुदाय सशक्त, तब ही शहर समृद्ध

ललित गर्ग दिल्ली*********************************** ‘विश्व शहर दिवस'(३१ अक्टूबर) विशेष… ‘विश्व शहर दिवस’ हर साल ३१ अक्टूबर को मनाया जाता है। इसका उद्देश्य शहरीकरण में अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की रुचि बढ़ाना, चुनौतियों का समाधान करने में देशों के बीच सहयोग को प्रोत्साहित करना और सतत विश्व नगर योजना को अधिक मानवीय, अपराधमुक्त एवं पर्यावरण संपोषक बनाना है। यह … Read more

प्रदूषण:अधिकार के लिए एकजुट हों

ललित गर्ग दिल्ली*********************************** दिल्ली में बढ़ता प्रदूषण एक बार फिर दुनिया की नजरों में भारत की राजधानी को शर्मसार कर रहा है। कभी संस्कृति, ऊर्जा और प्रगति की पहचान रही दिल्ली आज धुएं और धूल की चादर में लिपटी दिखाई देती है। हवा में घुला ज़हर इस हद तक बढ़ चुका है कि साँस लेना … Read more

स्वास्थ्य और दीर्घायु होने का आशीर्वाद मिलता है संतान को

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)************************************ छठ पर्व विशेष… छठ पर्व षष्ठी का अपभ्रंश है। कार्तिक मास की अमावस्या को दीपावली मनाने के ६ दिन बाद कार्तिक शुक्ल को मनाए जाने के कारण इसे छठ कहा जाता है।यह ४ दिन का त्यौहार है और इसमें सफाई का खास ध्यान रखा जाता है। इस व्रत को करने के नियम … Read more

प्रकृति और अस्तित्व

संजीव एस. आहिरेनाशिक (महाराष्ट्र)********************************************* सूरज आरक्त होकर पश्चिम की देहरी पर ढलने जा रहा है। अपने सम्पूर्ण ओज से ढुल-मुल स्वर्णिम किरणों का आख़री स्पर्श सृष्टि पर फेरता हुआ धीरे-धीरे क्षितिज के उस पार ओझल होता जा रहा है। शाम अपने रंगीन अंदाज से छम-छम पैंजनिया बजाती हुई बिल्ली के कदमों सी हौले-हौले उतरने लगी … Read more

बिहार: राहुल गांधी की नाकाम राजनीति का भी द्योतक ‘तेजस्वी’

ललित गर्ग दिल्ली*********************************** बिहार विधानसभा चुनाव में सतरंगी रंग देखने को मिल रहे हैं।आखिर उस घोषणा का रंग भी देखने को मिल ही गया, जिसका सबको इंतज़ार था। आखिरकार तेजस्वी यादव को महागठबंधन की ओर से मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित कर दिया गया है। यह निर्णय ‘देर आए, दुरुस्त आए’ की कहावत को चरितार्थ … Read more

फुर्सत के पल और ओटलों पर हम…

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ सुख में या खुशियों की इस अमर बेला में हर कोई अपने अपने घरों की ओर बढ़ता जा रहा है। हम और हमारी आस्था में जो संस्कृति व सभ्यता के अनुरूप एक तरह के अपनेपन वाली बात होती है। वह पर्व, खुशियों, त्योहारों की मस्ती और परिवार के साथ हम … Read more

आत्मिक उजाले का महापर्व ‘दीपावली’

ललित गर्ग दिल्ली*********************************** दीप जलें, मन महके (दीपावली विशेष)… ‘दीपावली’ केवल दीपों का ही पर्व नहीं है, बल्कि यह आत्मा के भीतर बसे अंधकार को मिटाने की साधना का अनुष्ठान है। यह भारतीय संस्कृति की आत्मा है, जो जन-जन के जीवन में सुख, समृद्धि और खुशहाली का उजास फैलाती है। इस उत्सव की श्रृंखला धनतेरस … Read more

सामाजिक-सांस्कृतिक धुरी है आलोक पर्व

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)************************************ दीप जलें, मन महके (दीपावली विशेष)… आलोक पर्व अंधकार से प्रकाश का पर्व है। यह पर्व-त्यौहार आशा और सकारात्मकता के साझा उत्सव में विविध पृष्ठभूमि के लोगों को एकजुट करता है। इस आलोक पर्व की जीवंत सजावट, आतिशबाजी और सामुदायिक दावतों से समाज में एकता और एकजुटता की भावना को बढ़ावा मिलता … Read more