मौन में घुट रहा प्रेम

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)************************************ कहाँ गया रिश्तों से प्रेम…?… निःसंदेह प्रेम रिश्ते से बढ़ कर होता है। प्रेम से तो ऐसा संबंध बन जाता है, जो अतुलनीय होता है। रिश्ते तो अपने पारिवारिक संबंधों पर आधारित होते हैं। प्रेम को मापने के लिये तो कोई कसौटी ही अभी तक नहीं बनी है। यदि प्रेम नहीं है, … Read more

कहाँ गया वो आपसी मेलजोल

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** कहाँ गया रिश्तों से प्रेम…?… एक आक्रोश उभरता है मेरे मन में, कैसे निडर हो गए हैं आजकल बच्चे। माँ इतनी देर से पुकार रही है पर कुछ जवाब ही नहीं दे रहे हैं, बैठे होंगे कान में इयर फ़ोन लगा कर…। क्या समय आ गया है रिश्तों की कोई मान्यता ही … Read more

राजनीतिक संघर्ष नहीं, ‘सेतु’ बनाएँ हिन्दी को

ललित गर्ग दिल्ली*********************************** दक्षिण भारत के विभिन्न राज्यों में हिन्दी विरोध की राजनीति अब महाराष्ट्र में भी उग्र से उग्रत्तर हो गई, इसी कारण त्रिभाषा नीति को महाराष्ट्र में लगा झटका दुखद और अफसोसजनक है। आखिरकार राजनीतिक दबाव, लम्बी रस्साकशी और कशमकश के बाद महाराष्ट्र की देवेंद्र फडणवीस सरकार ने विद्यालयों में हिंदी की पढ़ाई … Read more

कहीं देर न हो जाए…?

सीमा जैन ‘निसर्ग’खड़गपुर (प.बंगाल)********************************* सोने की चिड़िया को तो छोड़ दो, शर्म और संस्कार की चिड़िया को भी उड़ा दे रही है ये अश्लील सीरिज और आजकल की अश्लील फिल्में। सो जाओ… गधे-घोड़े बेच के सब लोग सो जाओ। जिसको जहां से देश में छेद करना है, करने दो।ये क्या है सच्चाई के नाम पर … Read more

रिश्ते रूपी पौधे में निरंतर छिड़कें प्यार और अपनापन

पी.यादव ‘ओज’झारसुगुड़ा (ओडिशा)********************************************** कहाँ गया रिश्तों से प्रेम…?… बड़ी अजीब-सी बात है। बात यदि रिश्तों की उठे तो, मन बड़ा मायूस हो जाता है। एक गहरी सोच में डूब जाता है मन! और एकाएक आँखों के सामने रिश्तों के तमाम चेहरे तैरने लगते हैं। मन रम जाता है उन रिश्तों की गुंथी माला में, जिसे … Read more

तनाव और व्यस्तता में गुम हैं रिश्ते

दीप्ति खरेमंडला (मध्यप्रदेश)************************************* कहाँ गया रिश्तों से प्रेम ?… ‘रिश्ता’ एक ऐसा शब्द है, जिसमें भावनाएं, आत्मीयता और समर्पण समाहित होता है, पर आज की भागती-दौड़ती ज़िंदगी में रिश्तों की परिभाषा बदलती जा रही है। जहां पहले रिश्ते नि:स्वार्थ प्रेम से जुड़े होते थे, आज वे सुविधा स्वार्थ से बंधे दिखते हैं। इसलिए यह प्रश्न … Read more

रच जाते कीर्तिमान

राधा गोयलनई दिल्ली****************************************** ईश्वर की इच्छा से ही संसार में सब कुछ होता है,कुछ लोगों की ज़िंदगी से, यही सत्य उजागर होता हैकोई मूक-बधिर होता है तो कोई नेत्रहीन पैदा होता,तो कोई किसी दुर्घटना में, अनचाहे अपंग हो जाता हैकुछ हैं जो ऐसा होने पर, बिल्कुल साहस खो देते हैं,ऐसे भी लोग हैं जो हर … Read more

बेटियों के लिए मोह बढ़ना अच्छा संकेत

ललित गर्ग दिल्ली*********************************** दुनियाभर में माता-पिता आमतौर पर अब तक बेटियों की तुलना में बेटों को ज्यादा पसंद करते आ रहे हैं, लेकिन प्राथमिकताओं को लेकर वैश्विक दृष्टिकोण में एक महत्वपूर्ण और बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। इस बात के संकेत मिल रहे हैं कि अब लड़के की तुलना में लड़कियों को अधिक … Read more

वर्तमान के रिश्तों में घात दुखद

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ कहाँ गया रिश्तों से प्रेम ? वर्तमान परिदृश्य में देखें तो सोशल मीडिया, फिल्म और वेबसाईट के अपराध दृश्यों की नक़ल असल ज़िंदगी में हो रही है, जिससे समाजिक ताना-बाना बिखरा हुआ नजर आ रहा है। इंसान की बढ़ती महत्वाकांक्षा के कारण राह से भटकती युवा पीढ़ी अपना आज तो … Read more

नवाचार की नई सुबह:पत्रकारिता में ‘कृत्रिम बुद्धिमता’

डॉ.शैलेश शुक्लाबेल्लारी (कर्नाटक)**************************************** आज के समय में जब तकनीक हर क्षेत्र को बदल रही है, पत्रकारिता भी इससे अछूती नहीं रही। खासकर हिंदी पत्रकारिता में अब ऐसे एआई एंकर (एआई) और चैटबॉट्स का प्रयोग बढ़ गया है, जो खबरें पढ़ते हैं, सवालों के जवाब देते हैं और कभी-कभी सजीव अपडेट भी देते हैं। उदाहरण के … Read more