लघुकथाओं का सामाजिक दृष्टिकोण
गोपाल मोहन मिश्रदरभंगा (बिहार)***************************************** जब ओडिशा के एक कथाकार मित्र ने मुझे यह खुले मन से कहा -“हिन्दी में लघुकथाएँ प्रामाणिक एवं प्रभावी ढंग से लिखी जा रही है। उड़िया भाषा में हिन्दी की लघुकथाओं का अनुवाद हो रहा है, इससे लगता है कि हिन्दी की लघुकथाओं ने बहुत प्रगति की है” तो मुझे भी … Read more