पिता का महत्व…

गोपाल मोहन मिश्रदरभंगा (बिहार)***************************************** ४५ वर्षीय दीवान की नौकरी छूट गई थी, बॉस ने जलील करके ऑफिस से निकाल दिया था। पिछले १२ महीनों में तीसरी बार उसे नौकरी से निकाला गया था। रात हो चुकी थी। वह बाजार में पेड़ के नीचे रखी एक बेंच पर बैठा था। घर जाने का उसका जरा भी … Read more

समरसता की मानक है होली

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* होली सतरंगी खुशियों, मुस्कान, अपनापन, मधुरिम रिश्तों, माधुर्य, सद्भावना, भक्ति, समरसता, सहजता, औदार्य, उदात्त, परस्पर व्यवहार, वास्तविक फागुनी प्राकृतिक सौन्दर्यीकरण एवं सुस्वादु पकवानों का सत्यजय आनंदमय पर्व है। प्रेम और सत्य के इन्द्रधनुषी रंगों की विविधताओं से सम्पन्न रंगोत्सव मानवीय आनन्दप्रद सौहार्द्र पूर्णाचरण का मानसरोवर है, जिसमें हंस हो … Read more

दुष्कर्म से शर्मसार होता देश, सख्त होना होगा

ललित गर्ग दिल्ली*********************************** ‘अतिथि देवो भवः’ भारतीय संस्कार में मेहमान को भगवान का दर्जा दिया गया है, लेकिन आए दिन विदेशी मेहमानों के साथ हो रहे अपराध, यौन-दुराचार एवं व्यभिचार इसे धता बता रहे हैं। तमाम कोशिशों के बावजूद विदेशियों के साथ होने वाले अपराध कम नहीं हो रहे हैं। हाल ही में २ विदेशी … Read more

मार्ग के काँटे स्वयं ही निकालने होंगें

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)************************************ भारतीय संविधान ने महिलाओं को पुरूषों के बराबर अधिकार दिए हैं। संविधान के अनुच्छेद १४ में कहा गया है, कि स्त्री-पुरूष दोनों बराबर हैं। अनुच्छेद १५ के अंतर्गत महिलाओं के भेदभाव के विरुद्ध न्याय पाने का अधिकार प्राप्त है। समय-समय पर इनके मान-सम्मान और अस्मिता की रक्षा के लिए भी कानून बनाए … Read more

होली पर सच्चाई के रंग भरें

ललित गर्ग दिल्ली*********************************** रंग बरसे… (होली विशेष)… होली ऐसा त्योहार है, जिसका धार्मिक ही नहीं बल्कि सांस्कृतिक-आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष महत्व है। पौराणिक मान्यताओं की रोशनी में होली के त्योहार का विराट् समायोजन बदलते परिवेश में विविधताओं का संगम बन गया है, दुनिया को जोड़ने का माध्यम बन गया है। हमारी संस्कृति की सबसे बड़ी … Read more

उल्लास संग बरसे सद्भाव का रंग

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ रंग बरसे… (होली विशेष)… इस आपाधापी के युग में मनुष्य आधुनिकता की ओढ़नी ओढ़ कर निकल जाता है। समय की बलिहारी है, कि आज किसी के पास समय नहीं है। भारत के बड़े- बड़े त्योहार व पर्व मनाने की हमारी परम्परा, आस्था व सनातन संस्कृति को सब इस आधुनिक युग … Read more

अब झूठों का बोलबाला…

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ उल्टी दिशा में बह रही नदियाँ, बिगड़ता प्रकृति का संतुलन, अब हंस नहीं; कौआ मोती खा रहा है।ये जमाना नया जरूर है, पर बहुत ही नकारात्मकता को लेकर गलत कामों की हौसला अफजाई कर रहा है। आज सच बोलने वाला परेशान है और झूठ बोलने वाला पाक-साफ है। एक चेहरे … Read more

नशे के खिलाफ हो महत्वाकांक्षी युद्ध

ललित गर्ग दिल्ली***********************************           पंजाब में आतंकवाद की ही तरह नशे एवं नशीली सामग्री के धंधे ने व्यापक स्तर पर अपनी पहुंच बनाई है, जिसके दुष्परिणाम पंजाब के साथ-साथ समूचे देश को भोगने को विवश होना पड़ रहा है। पंजाब नशे की अंधी गलियों में धंसता जा रहा है। सीमा पार … Read more

साहित्य अर्थात ‘सत्यम शिवम सुंदरम’

पी.यादव ‘ओज’झारसुगुड़ा (ओडिशा)********************************************** साहित्य सरल हो सकता है, परंतु सस्ता या ओछा नहीं हो सकता। जी, हाँ अनुभव की कूची से कल्पना के इंद्रधनुषी रंगों को समेट कर जब मन की परत से बाहर जीवन के ‘सत्यम शिवम सुंदरम’ भाव को शब्दमय रूप में उकेर दिया जाता है,तब वह ही साहित्य सदृश्य शोभायमान हो जाता … Read more

वर्तमान में नारी साजो-सामान क्यों ?

कुमकुम कुमारी ‘काव्याकृति’मुंगेर (बिहार)********************************************** नारी से नारायणी (महिला दिवस विशेष)… नारी तुम नारायणी हो, शक्तिपुंज हो, जीवनदायिनी हो। वास्तव में हमारे समाज में नारी को नारायणी समझा जाता था। उन्हें सर्वोच्च स्थान प्राप्त था, क्योंकि नारी को सृष्टि का आधार माना जाता था। देवता भी इनकी गोद में खेल खुद को धन्य समझते थे। नारी … Read more