विनाश ही विनाश, संकल्प अवश्य लो

राधा गोयलनई दिल्ली****************************************** हर तरफ विनाश ही विनाश है। कुछ देशों की अति विस्तारवादी नीतियों ने सारे विश्व को युद्ध के मुहाने पर खड़ा कर दिया है। एक युद्ध खत्म नहीं होता कि, दूसरा युद्ध शुरू हो जाता है। मणिपुर में कुकी और मैतेई लोगों में हिंसा शुरू हो गई, उसमें कितना विनाश हुआ। अभी … Read more

हिंदी की लिपि और नया संस्करण

प्रकाश निर्मल,पुणे (महाराष्ट्र)**************************************** यह सर्व विदित है कि जॉर्ज अब्राहम ग्रीअर्सन ने कई वर्षों के अध्ययन के बाद भारतीय भाषाओं का एक विस्तृत सर्वेक्षण रिपोर्ट १९१६ में प्रकाशित की थी। इस समय उनके द्वारा की गई व्याख्याएं आज भी विद्वानों के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण हैं। हिंदुस्तान (मूल फारसी शब्द) इस क्षेत्र की सीमाओं को निर्धारित … Read more

‘सर्वोच्च’ टिप्पणी से पत्रकारों की स्वतंत्रता को मिला बल

ललित गर्ग दिल्ली************************************** सर्वोच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी में कहा कि पत्रकारों के विरुद्ध सिर्फ इसलिए आपराधिक मामला नहीं दर्ज किया जाना चाहिए, क्योंकि उनके लेखन को सरकार की आलोचना के रूप में देखा जाता है। न्यायमूर्ति हृषिकेश राय और एसवीएन भट्टी की पीठ ने कहा कि लोकतांत्रिक देश में विचार व्यक्त करने की … Read more

गरबे का थोथा गर्व

डॉ. मुकेश ‘असीमित’गंगापुर सिटी (राजस्थान)******************************************** नवरात्रि के आते ही जैसे शहर में महापर्व का बिगुल बज उठा हो। चारों तरफ गरबा और डांडिया की धूम है। सड़कों से लेकर गलियों तक एक ही आवाज़ गूंज रही है- “जय माता दी, डीजे वाला भैया, थोड़ा गाना लगा दो, बेबी को बेस पसंद है।” डीजे की रीमिक्स … Read more

न जन्म सहज, न मृत्यु…

डॉ. प्रताप मोहन ‘भारतीय’सोलन(हिमाचल प्रदेश)***************************************************** पुराने समय में महिलाएं प्रसव घर पर ही करती थी। उस समय दाईयाँ होती थी, जो सुरक्षित प्रसव कराती थी। अस्पताल जाने की जरूरत ही नहीं पड़ती थी, न कोई ज्यादा खर्च, न कोई झंझट। बहुत सरलता से प्रसव हो जाता था, पर वर्तमान युग में प्रत्येक प्रसव अस्पताल में … Read more

आराधना में आधुनिकता का तड़का मत लगाओ

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ आदिशक्ति माँ दुर्गा (नवरात्रि विशेष)… आदिशक्ति माँ दुर्गा की उपासना का महापर्व नवरात्रि पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाता है, जिसमें छोटी-छोटी बच्चियों के साथ सभी वर्ग के पुरुष, महिला, लड़कियाँ और युवा इस महारास गरबों की धूमधाम की जान होते हैं। ऐसे धार्मिक उत्सव में माता रानी की … Read more

शांति एवं मुस्कान का झरना ‘पर्यटन’

ललित गर्ग दिल्ली************************************** अंतरराष्ट्रीय एकता, शांति, सौहार्द और आर्थिक समृद्धि को बढ़ावा देने सहित दुनिया में शांति एवं अयुद्ध को बढ़ावा देने में पर्यटन की भूमिका महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह अंतर-सांस्कृतिक बातचीत को प्रोत्साहित करता है। लोग जितना अधिक यात्रा करते हैं, उतना ही वे विविध संस्कृतियों का अनुभव करते हैं, जिससे अधिक सहिष्णुता और … Read more

बापू के फ़र्ज़ आज भी प्रासंगिक

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ गाँधी जयंती (२ अक्टूबर) विशेष… सत्य की राह पर जब कोई मनुष्य चलता है, तो स्वाभाविक है कष्ट तकलीफ़ व परेशानी होती है पर जो सच्ची राह पर चलता है, वह इन छोटी-मोटी चीजों से बड़ी सीख लेकर आगे बढ़ जाता है। वकील मोहनदास करमचंद गांधी अपने-आपमें सशक्त अभिव्यक्ति के … Read more

महात्मा और गांधी

डॉ. मुकेश ‘असीमित’गंगापुर सिटी (राजस्थान)******************************************** गाँधी जयंती (२ अक्टूबर) विशेष…. रात सपने में गांधी जी ने दर्शन दिए। सच पूछो तो मैंने पहचाना नहीं, न तो चश्मा.., न लाठी…, धोती भी फटी हुई, साथ में ३ बन्दर भी नहीं थे, चरखा भी नहीं, बताओ! भला कैसे पहचानता…। बस कमर झुकी हुई थी। मेरे पास आकर … Read more

शाकाहार:पर्यावरण और विश्व-व्यवस्था होगी सुरक्षित

ललित गर्ग दिल्ली************************************** विश्व शाकाहार दिवस (१ अक्टूबर) विशेष… ‘विश्व शाकाहार दिवस’ प्रतिवर्ष १ अक्टूबर को पूरे विश्व में मनाया जाता है। १९७८ में अंतर्राष्ट्रीय शाकाहारी संघ द्वारा ‘शाकाहार से खुशी, करुणा और जीवन-वृद्धि की संभावनाओं को बढ़ावा देने’ के लिए इसका समर्थन किया गया था। यह शाकाहारी जीवन शैली के नैतिक, पर्यावरणीय, स्वास्थ्य और … Read more