भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर ‘चातुर्मास’

ललित गर्ग दिल्ली************************************** चातुर्मास शुभारंभ (१७ जुलाई) विशेष… भारतीय धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा में चातुर्मास का विशेष महत्व है। विशेषकर वर्षाकालीन चातुर्मास का। हमारे यहाँ मुख्य रूप से तीन ऋतुएँ होती हैं। वर्ष के १२ महीनों को इनमें बॉंट दें, तो प्रत्येक ऋतु ४-४ महीने की हो जाती है। वर्षा ऋतु के चार महीनों के … Read more

भुखमरी-कुपोषण:जागरूक होना पड़ेगा सरकारों को

ललित गर्ग दिल्ली************************************** संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) द्वारा भारत सहित पूरे विश्व में भूख, कुपोषण एवं बाल स्वास्थ्य पर समय-समय पर चिंता व्यक्त की गई है। यह चिन्ताजनक स्थिति विश्व का कड़वा सच है, लेकिन शर्मनाक सच भी है और इससे उबरना जरूरी है। कुपोषण और भुखमरी से जुड़े वैश्विक प्रतिवेदन … Read more

अनमोल भेंट ‘गुरु दक्षिणा’

डॉ.पूजा हेमकुमार अलापुरिया ‘हेमाक्ष’मुंबई(महाराष्ट्र) ********************************************************* पुस्तक समीक्षा… जिस रफ़्तार से समय गतिमान हुआ दिखाई देता है, उससे प्रतीत होता है कि, रफ़्तार ने मनुष्य से उसका समय ही चुरा लिया है। छोटा हो या बड़ा, जिसे देखो यही कहता प्रतीत होता है,-“समय ही नहीं है…।” एक समय था जब घरों में बच्चों के लिए तरह-तरह … Read more

कोई जन्म से भगवान नहीं होता

राधा गोयलनई दिल्ली****************************************** कोई जन्म से भगवान पैदा नहीं होता। वह मानव के रूप में ही जन्म लेता है और महान कार्यों से महामानव बन जाता है तथा कालान्तर में भगवान कहलाता है। हम लोगों के साथ एक बड़ी मुश्किल यह है कि, हम महामानवों को भगवान मानकर उनकी पूजा तो करते हैं, लेकिन उनके … Read more

वास्तविक सौन्दर्य ‘सादगी’

ललित गर्ग दिल्ली************************************** ‘राष्ट्रीय सादगी दिवस’ (१२ जुलाई) विशेष… कहते हैं ना ज़िंदगी जितनी साधारण होगी, उतनी ही अच्छी एवं आनन्दमय होगी। हर इंसान सुन्दर एवं आकर्षक दिखना चाहता है। दिखने में बनावटीपन है, प्रदर्शन है, अनुकरण है, जबकि वास्तविक सौन्दर्य सादगी में है। सबसे सुन्दर दिखने की चाह में एक इंसान दूसरे इंसान तक … Read more

खतरनाक चुनौती है पलायन एवं बढ़ता शहरीकरण

ललित गर्ग दिल्ली************************************** भारत में बढ़ता शहरीकरण भले ही विकास का आधार हो, लेकिन इसने अनेक समस्याओं को भी जन्म दिया है। बढ़ता शहरीकरण केवल भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया के लिए एक बड़ी चुनौती बन रहा है। वर्तमान में दुनिया की कुल आबादी में से ५६ फीसदी शहरों में रहने लगी है। गाँवों से … Read more

‘मेघदूत’ कालिदास जी का अमर खंडकाव्य

डॉ. मीना श्रीवास्तवठाणे (महाराष्ट्र)******************************************* आषाढ़ प्रथम दिवस (भाग २)… राष्ट्रीय चेतना का स्वर जगाने का महान कार्य करने वाले महाकवि कालिदास जी कवि का राष्ट्रीय नहीं, बल्कि विश्वात्मक कवि के रूप में ही गौरव करना उचित है। उनके अत्युच्य श्रेणी के साहित्य का मूल्य मापन संख्यात्मक न करते हुए गुणात्मक तरीके से ही करना होगा। … Read more

कदम-कदम ‘जनभाषा में न्याय’ की ओर बढ़ रहे हम!

डॉ. मोतीलाल गुप्ता ‘आदित्य’मुम्बई(महाराष्ट्र)********************************************** जब हम जनतंत्र की बात करते हैं तो यह भी अपेक्षा की जाती है कि जनता के सभी कार्य, शासन- प्रशासन, न्याय शिक्षा और रोजगार आदि जनता की भाषा में हों, लेकिन १५ अगस्त १९४७ को भारत की स्वतंत्रता के बाद ऐसा नहीं हो सका। संविधान निर्माताओं ने अंग्रेजी को संविधान … Read more

भारत:संविधान पर हमला करने वाले भूल गए

सपना सी.पी. साहू ‘स्वप्निल’इंदौर (मध्यप्रदेश )******************************************** अभी हमारे देश भारत का विपक्ष संविधान की जो दुहाई देता फिरता है, वह भूल जाता है कि जितनी बार संविधान पर हमले कांग्रेस के सत्तारूढ़ रहते हुए, वैसे तो भाजपा (राजग गठबंधन) की सरकार के पूर्व के २० वर्ष में भारत ने कभी नहीं देखे। हम भारतीय राजनीतिक … Read more

हाथरस हादसा:हृदयविदारक घटना के कई सवाल, निर्णायक कार्रवाई हो

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ उत्तर-प्रदेश के हाथरस में श्री नारायण साकार विश्व हरि (भोलेबाबा) के सत्संग के समागम में हुई भगदड़ ने १२१ लोगों की जान ले ली। ऐसा होने के बाद ना तो बाबा अपने अनुयायियों के पास आए और ना आश्रम के सेवादार प्रतिनिधि कुछ कह सके। फिर बाबा ने अपना पल्ला … Read more