माँ के जज़्बात
डॉ. विद्या ‘सौम्य’प्रयागराज (उत्तर प्रदेश)************************************************ माँ के हाथों की लकीरें, घिस गईं थीं,बर्तन मांजते…पाँव की बिछिया दब गई थी,रस्में निभाते…घूंघट के नीचे ले लेती थी सिसकियाँ तब,जब, याद आ जाते थे पीहर के नजारेब्रम्ह बेला में ही पीस-कूट लेती थी,गुनगुनाते अनाज के दाने,भर लाती थी गाँव के बीच में बने,पक्के कुएं से ताजा पानी। अपने … Read more