बोझ ढोती स्त्रियाँ
डॉ. विद्या ‘सौम्य’प्रयागराज (उत्तर प्रदेश)************************************************ बोझ ढोती स्त्रियाँ,तन से ज्यादा, मन से थकी होती हैंजैसे ही लांघती है घर की चौखट,गहन विचारों की चादर सेढक लेती हैं अपनी संवेदनाओं को,अंतर्मन की परतों में लिपटीउनकी ख्वाहिशें…अपनों के बंद दरवाजे में,सिसकती, बिलखती, घुटती, कचोटतीकेंचुली की भांति, रौंद जाती हैं…और…सौंदर्य, जो देह से उन्मुक्त होकर,ले लेता है अनचाहा … Read more