रात भी बड़ी अजीब होती
डॉ. श्राबनी चक्रवर्तीबिलासपुर (छतीसगढ़)************************************************* ये रात भी बड़ी अजीब होती हैं,एक हसीना की तरह हसीनकभी रंगीन तो कभी कमसिन। रैन नशीली है और चाँद जवां,नैनों में तेरे यामिनी की सबाचले जब तेज़ तो हो जाए हवा। निशिगंधा से निशि खिल उठे,सितारों से विभावरी जगमगा उठेबाँसुरी की धुन सुन मन झूम उठे। इस रजनी में सजनी … Read more