स्वागत करें प्रिय वसंत का

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)************************************ ज़िंदगी एक वसंत… (वसंत पंचमी विशेष)… प्रिय वसंत, तुम कब सेबर्फीले हो गए हो ?‘ग्लोबल वार्मिंग’ से घबराकर,कुहासे को साथ में लेकरओस की चादर ओढ़ कर,धुंध और बादलों के रथ परहोकर सवार,सूरज को डरा करउसकी उष्ण किरणों को धमकाकर,बर्फीली हवा के झोंके सेक्या तुम अपना रास्ताभटक गए हो…! कहाँ खो गए हो … Read more

मेरे दोस्त मेरे हमदम

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* बेताब मिलन प्रिय विरही मन, अल्फ़ाज़ दिली दिलकश तुम होबस एक एक लम्हा मुश्किल,बिन प्राण समझ तुम प्रियतम होसब कुछ खोयी हियतल बोयी,बस एक बार प्रिय आलिंगनपैगाम इबादत कशिश,दिली बेताब कयामत बस तुम हो। बेताब इश्क़ आशिकी लुटी, दिलराज बने सपने तुम होआगाज़ मुहब्बत गुलशन बन, अहसास ज़िंदगी अपने … Read more

सीख टोपी की

बबिता कुमावतसीकर (राजस्थान)***************************************** बेटा, सुन लो आज पिता काअनमोल अनुभव, पक्का तजुर्बा,इस दुनिया में सीधे चलनाअकसर बन जाता है सबसे बड़ा गुनाह। सीधे-सादे लोग यहाँभीड़ में सबसे पहले कटते हैं,जो टोपी पहनाना जान लेवही आगे सबसे तेज़ बढ़ते हैं। मुस्कान ओढ़ो, वचन मधुर रखो,मन में कुछ और, मुख पर कुछ और,सच की गठरी घर में … Read more

अमर शहीद राम प्रसाद बिस्मिल

आचार्य संजय सिंह ‘चन्दन’धनबाद (झारखंड )*************************************************** उत्तर प्रदेश का जिला शाहजहाँपुर,राम प्रसाद का जन्म खुशियाँ भरपूरतिथि ११ जून १८९७ याद रखें जरूर,महान् राष्ट्रभक्त शहीद पर करें गुरुर। प्रेरित की माँ मूलवती, पिता थे मुरलीधर,हाईस्कूल के बाद दिल में आज़ादी का गदरशिक्षा अधूरी छोड़, हो चले क्रांतिकारी सफ़र,१९ वर्ष के युवा पर ५ बार गिरफ़्तारी का … Read more

अगर पेड़ पैसों के होते…

डॉ. गायत्री शर्मा ’प्रीत’इन्दौर (मध्यप्रदेश )******************************************* अगर पेड़ पैसों के होते,हम सब मिलकर घर में बोते। जरूरत पड़ती जब पैसों की,नये-नये पेड़ों को बोते। गरीबी का तो नाम ना होता,सबके सब अमीर ही होते। खेतों में सोना उपजाते,सबके वारे-न्यारे होते। रातें तब ना काली होती,दिन सपनों से प्यारे होते। चारों तरफ हरियाली होती,‘कोरोना’ से रोग … Read more

निकली टोली

सरोज प्रजापति ‘सरोज’मंडी (हिमाचल प्रदेश)*************************************** मकर संक्रांति पर्व है आया,घर-घर खुशियाँ खूब लाया। बच्चों की निकल गई है टोली,मांग, घर-घर लोहड़ी टोली। मूंगफली, रेवड़ी संग मिठाई,लोहड़ी गाते, मंगल बधाई। पैसे, आशीष पूर्वज बांटे,नाना-नानी प्रेम, बुलाते। दिन की अवधि थोड़ा सरके,सर्द हवाएं हौले-हौले सरके। सूरज मानो रजाई ओढ़े,बचकर सर्दी दुबक कर बैठे। घी, दूध, खिचड़ी, तिल … Read more

परवाह नहीं है मुझको

गोपाल मोहन मिश्रदरभंगा (बिहार)***************************************** परवाह नहीं है मुझको,चाहे जैसे भी हों हालातमाँ श्यामा माई की कृपा से,बन जाती है हर बात…। शिशु सकल जगत है,जगत जननी वही हैं सबकी मातममतामयी हैं आँचल जिनका,लुटाती हैं स्नेह की सौगात।माँ श्यामा माई की कृपा से,बन जाती है हर बात॥परवाह नहीं है मुझको… मुँह फेर कर जब अपने,निभाना छोड़ … Read more

सदैव आजाद ‘नेताजी’

आचार्य संजय सिंह ‘चन्दन’धनबाद (झारखंड )*************************************************** सदैव आज़ाद, हिन्द क्रांतिवीर ‘नेताजी’ सुभाष,गुलामी से आज़ाद, कांग्रेस से आजाद योद्धा सुभाषजापान में भारतीय कैदी किए आजाद संग्रामी सुभाष,“तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूंगा” नेताजी सुभाष। २३ जनवरी १८९७ को कटक में जन्मे नेताजी सुभाष,माँ प्रभा देवी, वकील जानकीनाथ बोस के पुत्र सुभाषप्रेसीडेंसी कॉलेज, कैंम्ब्रिज विश्वविद्यालय … Read more

आँसू और खामोशी

डॉ. प्रताप मोहन ‘भारतीय’सोलन (हिमाचल प्रदेश)***************************************************** आँसू जब भीआते हैं,मन को हल्काकर जाते हैं। दिल का गुबारनिकल आता है,मन शांतहो जाता है। कभी खुशी केआँसू होते हैं,कभी गम केआँसू भी होते हैं। दिल के अरमानआँसुओं में बह जाते हैं,हम खामोशी मेंरह जाते हैं। आँसू और खामोशीका घना नाता है,आँख से आँसूखामोशी में ही आता है। … Read more

पहाड़ों का सपना

संजीव एस. आहिरेनाशिक (महाराष्ट्र)********************************************* शाम सिंदूरी-सिंदूरी अर्क में डूबीनहला रही है पहाड़ों को,दिनभर सूर्यस्नान किए पहाड़ सन गए हैंसिंदूरी वर्ण के रक्तिम फाहे सेपश्चिम की देहरी पर पसरता जा रहा है,सिंदूरी-सिंदूरी संसार। घुंघरू बाँधकर संध्या ठिठकी-ठिठकी-सी,घूम रही है पहाड़ों के इर्द-गिर्दमैं सुन रहा हूँ कदम-कदम पर पड़ती,घुंघरुओं की खनक। पाँवों में अलता लगाकर हौले-हौले पड़ते,पदचापों … Read more