परचम लहराए पुरजोर
ममता सिंहधनबाद (झारखंड)***************************************** नारी:संघर्ष, शक्ति, समाज और सफलता…. कामिनी जब बनी थी दामिनी,तब वो सृष्टि को बदल डाली। काली बनी थी झांसी की रानी,झुकी नहीं, मौत को गले लगाया। सावित्री ने यमराज को हराया,वरदान से पति को बचाया। सहनशीलता की मूर्ति तू रमणी,पति के साथ वन में रही तू रमणी। उर्मिला ने भवन में ही … Read more