‘ऑपरेशन सिंदूर’:बेहतर हो कि विपक्ष चर्चा ही करे

अजय जैन ‘विकल्प’इंदौर (मध्यप्रदेश)****************************************** संसद में चर्चा से भागना विपक्ष की रणनीति तो नहीं होनी चाहिए क्योंकि देश को भी यह जानने का अधिकार है कि आखिर सच क्या है, विपक्ष का लगातार हंगामा देखकर ऐसा लगता है कि वो सच को बाहर आने से रोकने में लगे हुए हैं। ऐसे में सवाल यह है … Read more

जहर घोलता अकेलापन, फिर से इंसान बनें

ललित गर्ग दिल्ली*********************************** “हर छठा व्यक्ति अकेला है”-यह निष्कर्ष विश्व स्वास्थ्य संगठन की ताज़ा रिपोर्ट का है, जिसने पूरी दुनिया को चिन्ता में डाला है एवं सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर हम कैसी समाज-संरचना कर रहे हैं, जो इंसान को अकेला बना रही है। निश्चित ही बढ़ता अकेलापन कोई साधारण सामाजिक, पारिवारिक … Read more

हरियाली के मनोरम साए

संजीव एस. आहिरेनाशिक (महाराष्ट्र)********************************************* कहा जाता है, “शहर की दवा और गाँव की हवा दोनों बराबर होती है”, विगत दिनों इस बात का मुझे प्रत्यक्ष अनुभव हुआ। उत्तर महाराष्ट्र के खेतों में इन दिनों बाजरा और मक्का की फसल लहलहा रही है। बड़ी जोरदार फसलें हैं। हरियाली से खिले खेतों के विस्तीर्ण पट, जंगलों में … Read more

‘विकास’ के हर कदम पर मिले ‘हरियाली’ का आशीर्वाद

पूनम चतुर्वेदीलखनऊ (उत्तरप्रदेश)********************************************** भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश में ‘हरियाली’ और ‘विकास’ को लेकर लंबे समय से बहस चलती रही है। विकास का मतलब होता है आर्थिक तरक्की, आधारभूत संरचना का निर्माण, रोज़गार का सृजन और जीवन की गुणवत्ता में सुधार;वहीं हरियाली का तात्पर्य है–प्रकृति का संरक्षण, वन्य जीवन की सुरक्षा, जलवायु संतुलन और … Read more

महिलाएँ और जघन्य अपराध-बेहद चिंताजनक

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)************************************ भारतीय समाज में विवाह को सात जन्मों का पवित्र बंधन कहा जाता है, जहाँ पति-पत्नी एक-दूसरे के साथी, सहयोगी और संबल होते हैं, परंतु विगत कुछ समय से जो घटनाएं सामने आ रही हैं, वह मन को बहुत व्यथित करती हैं। वह इस पवित्र रिश्ते की मर्यादा को तार-तार करती प्रतीत होती … Read more

बम धमाका: बड़ा सवाल-दोषी कौन ?

ललित गर्ग दिल्ली*********************************** ११ जुलाई २००६ को मुम्बई की भीड़भरी स्थानीय ट्रेनों में हुए श्रृंखलाबद्ध बम धमाकों ने समूचे देश को झकझोर कर रख दिया था। इसने पीड़ित परिवारों के साथ-साथ जन-जन को आहत किया था। ७ जगह पर हुए इन धमाकों में १८७ निर्दाेष लोगों की जान गई और ८२४ से ज्यादा लोग घायल … Read more

डिजिटल भारत:अपार संभावनाएँ, समावेशी नीतियों की जरूरत

डॉ.शैलेश शुक्लाबेल्लारी (कर्नाटक)**************************************** क्या आप जानते हैं कि भारत में हर मिनट १ हजार से अधिक लोग डिजिटल भुगतान कर रहे हैं और २०२५ तक देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था १ ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है ? फिर भी, देश के ६० फीसदी से अधिक ग्रामीण परिवारों के पास इंटरनेट की पहुंच नहीं है … Read more

आखिर क्या है ‘आधुनिकता’… ??

सीमा जैन ‘निसर्ग’खड़गपुर (प.बंगाल)********************************* आपने ध्यान दिया है कि आजकल ज्यादातर लोग आधुनिक (मॉडर्न) होना चाहते हैं। क्या बच्चे… क्या जवान… क्या उम्रदराज लोग… सभी इस विचित्र दौड़ में शामिल हैं। और दूसरी तरफ बाजार अटे पड़े हैं ऐसे लोगों की जरूरतें पूरी करने में। अजीबो-गरीब कपड़े, जूते, हार-हमेल, अनोखी डिजाइन के सजने-संवरने की वस्तुओं … Read more

लोकतंत्र की चिंता या सत्ता लोभ ?

ललित गर्ग दिल्ली*********************************** भारतीय लोकतंत्र आज विश्व के सबसे बड़े, जीवंत और जागरूक लोकतंत्रों में गिना जाता है। यह संविधान की मजबूत नींव, संस्थाओं की पारदर्शिता और जनता की जागरूकता से संचालित होता है, परंतु विडम्बना है कि देश का विपक्ष, विशेषकर कांग्रेस और उनके नेता राहुल गांधी बार-बार लोकतंत्र और संविधान पर खतरे की … Read more

वापसी

डॉ. योगेन्द्र नाथ शुक्लइन्दौर (मध्यप्रदेश)****************************** वृद्धाश्रम में अम्मा को खड़ा कर उसने उनका सूटकेस वहाँ रखा और औपचारिकताएँ पूरी करने के लिए कार्यालय की ओर चला गया।लौटकर आया तो अम्मा को आँसू पोंछते देख कर वह द्रवित हो गया।“क्या करूं अम्मा…? घर में शांति के लिए मजबूरीवश मुझे यह करना पड़ रहा है। तुम तो … Read more