माँ स्कंदमाता सुख लाई

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* माँ भवानी आ गयी है, मुस्कान प्रीत सुख लायी हो,करुणार्द्र चित्त संवेदन मन, कार्तिकेय मनाने आयी हो। जवाकुसुम पूजित माँ अम्बे, शरणागति सुत जगदम्बा होशशिकला शीतला माँ ललिते, तारकविनाशिनी अम्बा हो। आश्विन शुक्ल पूजन वन्दन, पंचम स्कंदमाता शक्ति हो,वैदिक पूजित माँ जगदम्बा, भवानी भक्तों की भक्ति हो। जय जननी … Read more

है सम्मोहक हिंदी

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** सौम्य, सुमधुर, सम्मोहक हिंदीसरल, सुलभ है सुवासित हिंदी,संस्कृत की यह सुता कहाती-सत्यं,शिवं,सुंदरम् हिंदी। सभ्य, शिष्ट, सम्मानित हिंदीसदाचार संचारित हिंदी,हो सामूहिक शक्ति प्रदर्शन-करें सरकारी कार्य में हिंदी। सुबह-शाम सब बोलें हिंदीसज्जन सरिस सुवासित हिंदी,संत समागम में शोभित है-सरस-सुधा बरसाती हिंदी। सुर-संगीत सजाती हिंदी,साहित्य सभी बताती हिंदीसंघर्षों के बीच फँसी यह-सर्व शक्ति संचालित हिंदी। … Read more

असफल दिल की दास्तानें सिद्धेश्वर की ग़ज़लों में बेहद खूबसूरत ढंग से अभिव्यक्त

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लखनऊ (उप्र)। प्रेम में सफल और असफल दिल की दास्तानें सिद्धेश्वर की ग़ज़लों में बेहद खूबसूरत ढंग से अभिव्यक्त हुई हैं। पुस्तक में दीक्षित दिनकौरी, अनिरुद्ध सिंह, रमेश कँवल, रेखा भारती मिश्रा और प्रेम किरण जैसे ख्यात शायरों ने भी अपने महत्वपूर्ण विचार व्यक्त किए हैं। निःसंदेह यह पुस्तक प्रभावशाली है।यह विचार अध्यक्षीय उद्बोधन में … Read more

माँ स्कंदमाता-५

सपना सी.पी. साहू ‘स्वप्निल’इंदौर (मध्यप्रदेश )******************************************** स्कंदमाता है करुणा की मूरत,सिंहवाहिनी, शुभ्र वर्णी सूरतकमलपुष्प पर पार्वती विराजे,गोद में कार्तिकेय स्वामी साजे। अद्भुत दिव्य आभा, चतुर्भुज,ज्ञानपुंज, शौर्य प्रतीक तनुज।दो हाथों में कमल को थामती,अभय मुद्रा से आशीष वारती। पंचम दुर्गा वात्सल्य की कृति,उपासकों को देती गति-मतिमाँ शक्ति स्त्रोत, दया की सागर,संतति सुख देती बात उजागर। कृपा … Read more

माँ कूष्मांडा-४

सपना सी.पी. साहू ‘स्वप्निल’इंदौर (मध्यप्रदेश )******************************************** ब्रह्माण्ड के विराने, शून्य में,जब कोई नहीं था आकारतब मंदहास माँ कूष्मांडा ने,सृष्टि रच, मिटाया अंधकार। चतुर्थ दुर्गा सूर्यलोक वासी,सकल सृष्टि का करें श्रृंगारसिंहवाहिनी, अष्टभुजावाली,कमंडल-कलश हस्त धार। धनुष, कमल, चक्र, गदा धारे,ब्रह्माण्ड जननी, आदि शक्तिधरती से नभ, जल से पाताल,अणु-अणु करते माँ की भक्ति। मातृछाया से हो जीवन निर्विघ्न,दूर … Read more

माता का जगराता

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* कितना पावन पर्व है, नवरातोंं का आज सुनो सब,शुभ-मंगलमय हो रहा, देखो आज समाज सुनो सबजगदम्बे तो कर रहीं, हर दिल पर अब राज जान लो,भजन-आरती, वंदना, बजें भक्ति के साज़ मान लोहरदय सुख का दाता, माता का जगराता,पावन रूप सुहाता, माता का जगराता‌। शैलपुत्री माँ हैं प्रथम, पुत्री पर्वतराज सुहातीं,प्रथम … Read more

जीवन की जड़ें पूर्वजों में, हम उनके ऋणी

डॉ. विद्या ‘सौम्य’प्रयागराज (उत्तर प्रदेश)************************************************ श्राद्ध, श्रद्धा और हम (पितृ पक्ष विशेष)… भारतीय समाज एवं संस्कृति में माता-पिता व गुरु को विशेष श्रद्धा व आदर दिया जाता है, उन्हें देवतुल्य या ईश्वर स्वरूप माना जाता है। माता-पिता अथवा पूर्वजों के प्रति श्रद्धा एवं आदर भावना जीवन पर्यन्त तक निभाना भी भारतीय समाज की संस्कृति का … Read more

पुरखे हमारे पूज्य हैं

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)************************************ श्राद्ध, श्रद्धा और हम (पितृपक्ष विशेष)… हिंदू पंचाँग के अनुसार,माह में होते हैं २ पखवारेआश्विन (क्वाँर) शुक्ल पक्ष में,पितृ पक्ष भी एक पखवारा हैजो वर्ष में एक बार ही आता है। पूर्णिमा से अमावस्या तक,अपने पूर्वजों को स्मरण करने काविधान हमारे पुरखों ने खूब बनाया है,जिसके कारण हम सभी उनकोआज भी करते … Read more

जीवन एक संगीत

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उर्मिला कुमारी ‘साईप्रीत’कटनी (मध्यप्रदेश )********************************************** जीवन एक मधुर संगीत की तरह होता है,कभी उदासी-सा तो कभी गमगीन होता है…। शब्दों का अंतर है, वो कहाँ से कहाँ सफ़र करता है,शब्दों के अंतर जाल में फंसकर, एक लगाव हो जाता है…। दर्द मिले या खुशी, सभी का अनुभव हो जाता है,उसी पथ पर खुद को अग्रसर … Read more

वेदों की वाणी की दुहिता

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** वेदों की वाणी की दुहिताशब्दों का भंडार लिए,तत्सम,सद्भव संग-साथ में-रस-छंदों का प्यार लिए । लोकोक्ति संग सजी पंक्तियाँअलंकार का ज्ञान लिए,लिपि हैं इसकी देवनागरी-उच्चारण को साथ लिए। नवरस से शोभित है हिंदीभावों का संज्ञान लिए,अक्षर-अक्षर बढ़ती जाती-भारत की पहचान लिए। आन-बान और शान देश की,तुलसी की पहचान लिए।राष्ट्र-वंदना करती हिंदी,देवनागरी साथ लिए॥