मुक़म्मल कहाँ हुई ज़िंदगी किसी की…
डॉ. श्राबनी चक्रवर्तीबिलासपुर (छतीसगढ़)************************************************* नई सुबह कहाँ हुई,ज़िंदगी में किसी कीरात भर जो सोते रहे,कल के इंतजार में। तमन्ना पूरी कब हुई,सब कुछ पा लेने कीनींद में सपने देखते रहे,हकीकत की फिक्र छोड़। ख्वाब कब पूरे हुए,यथार्थ की राह परज़िंदगी बहुत जटिल रही,कठिन डगर पर। प्रेम के धागे उलझे रहे,प्रीत की डगर परसुलझे कैसे फिर … Read more