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सबके उर में समाया तिरंगा है ये

डॉ.विद्यासागर कापड़ी ‘सागर’
पिथौरागढ़(उत्तराखण्ड)
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गणतंत्र दिवस स्पर्धा विशेष……….


खूँ से सींचा चमन है भूल न जाना,
निज की खुशी में ही तुम झूल न जाना।
तनिक याद कभी करना वीरों को भी-
आजादी है,ये सोच के फूल न जाना॥

निज का तंत्र नहीं गणतंत्र है ये,
सबके हितों का एकमात्र यंत्र है ये।
रोते क्यूँ हो अपने लिये ही ‘सागर’-
सबकी खुशी का भला सा मंत्र है ये॥

देखो मधुरिम रंगों से रंगा है ये,
हिम-सा कपाल,पावन ज्यूँ गंगा है ये।
दिखाता है राह जगत को यही यारों-
सबके उर में समाया तिरंगा है ये॥

भारत माँ का गौरव था भव्य याद करते हैं,
सुभाष,आजाद,राम,एकलव्य याद करते हैं।
ये अधिकार तो याद कर लिये बहुत हमने-
आओ चलो हम सभी कर्तव्य याद करते हैं॥

परिचय-डॉ.विद्यासागर कापड़ी का सहित्यिक उपमान-सागर है। जन्म तारीख २४ अप्रैल १९६६ और जन्म स्थान-ग्राम सतगढ़ है। वर्तमान और स्थाई पता-जिला पिथौरागढ़ है। हिन्दी और अंग्रेजी भाषा का ज्ञान रखने वाले उत्तराखण्ड राज्य के वासी डॉ.कापड़ी की शिक्षा-स्नातक(पशु चिकित्सा विज्ञान)और कार्य क्षेत्र-पिथौरागढ़ (मुख्य पशु चिकित्साधिकारी)है। सामाजिक गतिविधि के अंतर्गत पर्वतीय क्षेत्र से पलायन करते युवाओं को पशुपालन से जोड़ना और उत्तरांचल का उत्थान करना,पर्वतीय क्षेत्र की समस्याओं के समाधान तलाशना तथा वृक्षारोपण की ओर जागरूक करना है। आपकी लेखन विधा-गीत,दोहे है। काव्य संग्रह ‘शिलादूत‘ का विमोचन हो चुका है। सागर की लेखनी का उद्देश्य-मन के भाव से स्वयं लेखनी को स्फूर्त कर शब्द उकेरना है। आपके पसंदीदा हिन्दी लेखक-सुमित्रानन्दन पंत एवं महादेवी वर्मा तो प्रेरणा पुंज-जन्मदाता माँ श्रीमती भागीरथी देवी हैं। आपकी विशेषज्ञता-गीत एवं दोहा लेखन है।

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