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‘गली बचपन की’ पर राष्ट्रीय बाल साहित्य संगोष्ठी

आज से राजधानी में जुटेंगे देशभर के बाल रचनाकार
◾बदलते परिवेश में बाल साहित्य की भूमिका पर होगा गंभीर चिंतन
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भोपाल (मप्र)। बाल साहित्यकार स्व. कृष्ण कुमार अष्ठाना की स्मृति में ‘गली बचपन की’ विषय पर २ दिनी राष्ट्रीय बाल साहित्य संगोष्ठी का आयोजन आज १३ मार्च से भोपाल में किया जा रहा है। मप्र साहित्य अकादमी का यह कार्यक्रम स्मार्ट रोड स्थित एनआईटीटीटीआर परिसर (श्यामला हिल्स) में होगा, जिसमें विभिन्न राज्यों से बाल साहित्यकार, शोधार्थी तथा साहित्य प्रेमी भाग लेंगे और बच्चों के बदलते परिवेश में बाल साहित्य की भूमिका पर गंभीर विचार-विमर्श करेंगे।
अकादमी के निदेशक डॉ. विकास दवे ने बताया कि संगोष्ठी का उद्घाटन सुबह ११ बजे होगा। इसका उद्देश्य बाल साहित्य की वर्तमान स्थिति एवं उसके नए आयामों पर विचार-विमर्श करना है। इस दौरान बाल साहित्य की रचनात्मक प्रवृत्तियों, बाल मनोविज्ञान, डिजिटल युग में बच्चों की पढ़ने की आदत तथा लोक-संस्कृति से जुड़े बचपन के अनुभवों पर केंद्रित कई सत्र आयोजित किए जाएंगे, साथ ही संगोष्ठी में दोनों दिन साहित्यकार विभिन्न विषयों पर अपनी बात रखेंगे। यहाँ सबके बीच संवाद और अनुभवों का आदान-प्रदान भी होगा।
आपने आग्रह किया है कि भोपाल शहर के बाल साहित्यकार इस संगोष्ठी में अवश्य सहभागी बनें, ताकि यह प्रयास बाल साहित्य की समृद्ध परम्पपरा को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और सफल कदम के रूप में अंकित हो।
पहले दिन प्रथम सत्र में ‘बाल मनोविज्ञान और बाल साहित्य सृजन’, द्वितीय सत्र में ‘बाल साहित्य में बदलती परिवार व्यवस्था, शिक्षक एंव समाज की भूमिका’ सहित कुल ५ सत्र में विचार-मंथन होगा। ऐसे ही १४ मार्च को प्रथम सत्र में ‘बाल साहित्य पर सोशल मीडिया का प्रभाव तथा डिजिटल युग में बाल साहित्य की चुनौतियाँ और एआई का प्रभाव’, द्वितीय सत्र में बाल अवस्था के रचनाकारों की बाल साहित्य सृजन में भूमिका’ आदि विषयों पर कुल ५ सत्र में साहित्यकार अपनी बात रखेंगे।
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