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किया युवाओं में अद्भुत संचार

ममता सिंह
धनबाद (झारखंड)
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होशंगाबाद में जन्म लिए माखन लाल चतुर्वेदी,
माता सुंदरी बाई और पिता थे नंदलाल चतुर्वेदी।

चार अप्रैल अठारह सौ नवासी मध्य प्रदेश जन्म,
विधा थी काव्य, निबंध, नाटक और संस्मरण।

पत्नी ग्यारसी बाई, उपनाम ‘एक भारतीय आत्मा’,
संपादन और पत्रिका ‘कर्मवीर प्रताप’ औेर ‘प्रभा’।

आधुनिक काल ओजपूर्ण, भावात्मक स्वतंत्रता सेनानी,
कविता ‘दीप से दीप जले, एक तुम हो लड्डू ले लो जवानी।

वायु अमर राष्ट्र, मुझे रोने दो गंगा की विदाई,
पूरा नहीं सुनोगे तान पुष्प की अभिलाषा सिपाही।

सागर खड़ा बेड़ियाँ तोड़े, कैदी और कोकिला,
‘दीप से दीप जले’ सभी हैं इनकी ही कविता।

मिला पुरस्कार पहला साहित्य अकादमी,
जो उनकी ही है प्रमुख रचना ‘हिमतरंगिणी’।

१९६३ में मिला उन्हें पद्म भूषण पुरस्कार,
हिन्दी साहित्य का सबसे बड़ा देव पुरस्कार।

‘हिमकिरीटणी’ पर मिला १९४३ में देव पुरस्कार,
‘हिमतरंगिनी’ को १९५५ में साहित्य अकादमी पुरस्कार।

देशप्रेम में रत स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान,
देश के युवाओं में उसने किया अद्भुत संचार।

‘असहयोग आंदोलन’ में की उन्होंने भागीदारी,
इसलिए कई बार उन्होंने सजा जेल की काटी।

सभी काव्य है मरण ज्वार लो गूँजे धरा समर्पण,
माता वनवासी बिजुरी नागार्जुन युद्ध, युग चरण।

रंगों की होली अमीर इरादे-गरीब इरादे,
साहित्य देवता आदि थे निबंध उनके।

मुक्त गगन है, मुक्त पवन है माखन लाल,
सभी कविताएँ हैं लाजवाब, बेमिसाल।

३० जनवरी उन्नीस सौ अड़सठ में हुआ अवसान,
स्थान था भारत में झीलों की नगरी भोपाल॥