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बहुत कुछ कहता है ‘राष्ट्रीय ध्वज’

सरोजिनी चौधरी
जबलपुर (मध्यप्रदेश)
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राष्ट्रीय चिह्न किसी भी देश की पहचान होते हैं। इन चिन्हों में देश का ध्वज उस देश की प्रमुख पहचान होता है। हम सब भारत वासियों में अपने राष्ट्रीय ध्वज के लिए आदर एवं निष्ठा है, पर हम इसके इतिहास के विषय में नहीं जानते। पहले इस झंडे का स्वरूप कैसा था, समय-समय पर इसमें क्या परिवर्तन हुआ, यह प्रमाणित तो नहीं है पर ऐसा विश्वास है कि राष्ट्रीय ध्वज का प्रथम स्वरूप ३ समानान्तर पट्टियाँ थी। सबसे ऊपरी पट्टी हरे रंग की, बीच की पीले रंग की और नीचे की लाल रंग की थी। ऊपरी पट्टी पर कमल के ८ फूल अंकित थे, बीच की पट्टी में देवनागरी लिपि में ‘वंदे मातरम्’ लिखा था और नीचे की पट्टी में बायीं ओर सफेद सूर्य एवं दाहिनी ओर अर्ध चंद्र व तारा अंकित था। यह ध्वज सन् १९०६ में फहराया गया। मैडम भीका जी कामा तथा उनके सहयोगियों के क्रांतिकारी दल ने एक झंडा जर्मनी में सन् १९०७ में फहराया, जिसकी आकृति में थोड़ा अंतर था। इसमें लाल पट्टी पर अंकित सूर्य को दाहिनी ओर और अर्धचंद्र को बायीं ओर अंकित कर दिया गया। १९१७ में लोक मान्य तिलक और एनी बेसेन्ट द्वारा तीसरा झंडा फहराया गया। इसमें ५ लाल और ४ हरी पट्टियाँ व्यवस्थित की गई थीं, जिस पर सप्त ऋषि की आकृति के ७ तारे बने थे। सबसे ऊपरी बायें कोने पर ब्रिटिश ध्वज और दायें पर श्वेत अर्धचंद्र व तारा अंकित थ, पर झंडे पर ब्रिटिश ध्वज अंकित होने के कारण बहुत से लोगों ने इसे अस्वीकार कर दिया ।
१९२१ में अखिल भारतीय कांग्रेस समिति द्वारा गाँधी जी के नेतृत्व में ३ रंग का झंडा प्रस्तावित किया गया, जिसमें हरा, सफ़ेद और लाल रंग था। बीच के सफ़ेद रंग में नीले रंग का चरखा अंकित था। १९३१ तक सभी अधिवेशनों में इसी झंडे का प्रयोग किया गया ।
१९३१ में सर्वसम्मति से केसरिया, सफेद और हरे रंग की पट्टियों से युक्त तिरंगा झंडा सम्मानित हुआ, बीच के सफेद रंग पर नीले रंग के चरखे की आकृति अंकित की गई थी। १९४७ में संविधान सभा में २२ जुलाई को इस ध्वज को स्वतंत्र भारत के राष्ट्रध्वज के रूप में स्वीकार किया गया। रंग पहले वाले ही रहे, पर चरखे के स्थान पर सम्राट अशोक का धर्म चक्र प्रतिष्ठित किया गया, जो झंडे के दोनों ओर स्पष्ट दिखाई देता हो। झंडे का आकार आयताकार तथा झंडे की लंबाई-चौड़ाई का अनुपात २ः३ था।झंडे का यही रूप आज भी मान्य है। झंडे का केसरिया रंग त्याग का, सफ़ेद शान्ति का और हरा समृद्धि का तथा चक्र निरंतर गतिशीलता का प्रतीक है।