पद्मा अग्रवाल
बैंगलोर (कर्नाटक)
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संविधान से आम आदमी तक (२६ जनवरी विशेष)….
किसी भी देश के संचालन के लिए उसका संविधान बेहद अहम् होता है। हमारे भारत का संविधान दुनिया का सबसे अच्छा संविधान माना जाता है, क्योंकि इसमें हर किसी को समान अधिकार हैं। भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व की गारंटी देता है। इसकी विशेषता है कि यह अनेकता में एकता को समाहित किए हुए है और यही एकता राष्ट्र को विश्व पटल पर मजबूती से खड़ा रखने का काम करती है।
२६ जनवरी का दिन हमें ३ बड़ी उपलब्धियों की याद दिलाता है।
पहली, कि इस दिन हमें वह संविधान मिला, जिसे भारत के लोगों ने स्वयं अपना भविष्य तय करने के लिए बनाया था। दूसरी उपलब्धि-राष्ट्र को अपना मूल नाम ‘भारत’ वापस मिला। तीसरी बड़ी उपलब्धि-ब्रिटिश सम्राट द्वारा नियुक्त गवर्नर जनरल के स्थान पर हमारा अपना राष्ट्रपति मिला।
इसी दिन गवर्नर जनरल का झंडा उतारा गया और भारत के पहले राष्ट्रपति ने अपना झंडा फहरा दिया। इसी दिन संविधान सभा पहले आम चुनाव तक संसद में बदल गई। इसी दिन राष्ट्रपति की शपथ के बाद प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और उनके मंत्रिमंडल ने अपने संविधान को हाजिर-नाजिर कर शपथ ली थी।
भारत को १५ अगस्त को आजादी जरूर मिल गई थी, परंतु अपना संविधान न होने के कारण भारत का शासन २९ महीनों तक ब्रिटिश संसद द्वारा पारित ‘भारत सरकार अधिनियम १९३५’ के अनुसार ही चल रहा था। संविधान सभा को भारत का अपना संविधान गढ़ने में ३ वर्ष का समय लगा था। २६ जनवरी १९५० को जब देश में हमारा संविधान लागू हुआ, तब जाकर हमारी सरकार, हमारा शासन व व्यवस्था हमारे संविधान के मुताबिक चलने लगी।
संविधान को बनाने के लिए संविधान सभा में डॉ. भीमराव आम्बेडकर, जवाहरलाल नेहरू, डॉ. राजेंद्र प्रसाद, वल्लभ भाई पटेल, मौलाना अबुल कलाम आजाद, पंडित गोविंदवल्लभ पंत, आचार्य जे.बी. कृपलानी, शरत चंद्र बोस व सच्चिदानंद सिन्हा सदस्य और डॉ. प्रसाद अध्यक्ष थे।
इस वर्ष ७७वें गणतंत्र दिवस को ‘वंदे मातरम्’ के १५० वर्ष की थीम के साथ मनाया जा रहा है।
गणतंत्र दिवस हमारे ३ राष्ट्रीय पर्वों में से एक है। हमारे राष्ट्रीय त्यौहार ऐसे महत्वपूर्ण अवसर होते हैं, जब हम अतीत की ओर देख कर आकलन करते हैं, कि हमने क्या खोया, क्या पाया…? साथ ही भविष्य की चुनौतियों व लक्ष्य की ओर भी देखते हैं।
🔹तरक्की पर गर्व का दिन-
आजादी के बाद पंचवर्षीय योजनाओं, हरित क्रांति से हमारे देश की विकास यात्रा ने रफ्तार पकड़ी। इसके बाद हम तरक्की करते हुए आज भारत चाँद पर तिरंगा लहरा चुका है। हमारा देश न सिर्फ परमाणु शक्ति सम्पन्न बन चुका है, वरन् सेनाएं आधुनिक हथियारों, आधुनिक लड़ाकू विमानों, पनडुब्बियों व आधुनिक रायफल्स जैसे विध्वंसक हथियारों से सज्जित हो चुकी है। अपनी सेना की कुशलता और आधुनिक ब्रह्मोस मिसाइल के कारनामों को कुछ दिन पहले ही ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में देख चुके हैं ।
भारत देश ने आजादी के बाद विज्ञान, तकनीकी, शिक्षा और मनोरंजन क्षेत्र में इतनी तरक्की कर ली है, कि आज सारी दुनिया हमारी तरफ देख रही है। भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। इसलिए आज हमें अपने सशस्त्र बलों, पुलिस और अर्ध्य सैन्य बलों का अभिनंदन करना चाहिए।
🔹काफी पाना बाकी भी-
इतनी लंबी यात्रा के बाद अभी भी काफी-कुछ पाना बाकी है। देश में आज भी आतंकवाद, नक्सलवाद , लिंग भेद, महिला विरोधी अपराध व उनसे भेदभाव, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, गरीबी, अशिक्षा जैसी समस्याओं से निपटना बाकी है। हमें उन्हें जड़ से मिटाने के लिए एकसाथ आगे आना होगा। देश में हर घर में पर्याप्त पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करनी है। हर शहर व गाँव के हर घर को २४ घंटे बिजली के लक्ष्य को पाना है। हमें आज के दिन अपने-अपने क्षेत्र को स्वच्छ रखने का संकल्प भी लेना चाहिए।
गणतंत्र दिवस के अवसर पर हम सबको मिलकर सामाजिक बुराइयों को समाप्त करने और वैश्विक मंच पर अपने भारत देश को गौरवान्वित करने की दिशा में प्रयास करते रहना है। जय हिंद… जय भारत… भारत माता की जय।