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रंगायन रंगोत्सव में गीत-शायरी में डूबे श्रोता

देहरादून (उत्तराखंड)।

प्रख्यात रंगकर्मी निवोदिता बौठियाल द्वारा स्थापित रंगायन एसोसिएशन ने देहरादून में रंगोत्सव का आयोजन किया, जिसके अंतर्गत गंगा जमुनी संस्कृति के प्रतीक कवि सम्मेलन मुशायरा का भव्य आयोजन हुआ। इसकी सदारत मशहूर शायर बदरुद्दीन जिया ने की।
     कवि सम्मेलन का शुभारंभ उत्तराखण्ड के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण और वन मंत्री सुबोध उनियाल ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। सुपरिचित गीतकार सतीश बंसल, मशहूर शायरा मोनिका मंत्शा, कवयित्री-कथाकार डॉली डबराल, आरिफ अतीब आदि ने अपने कलाम पेश किए।
डॉली डबराल ने रंगायन की अध्यक्षा श्रीमती निवेदिता को समर्पित कविता पढ़ते हुए कहा कि ‘पायदान में नहीं किसी की, ना चौखट में पड़ी हुई हूँ’। इसे श्रोताओं ने बहुत पसंद किया। युवा शायर अमजद खां अमजद ने अपनी ग़ज़ल में मुफलिसी का चित्रण किया-‘चलना मुश्किल कर देता है मुफलिसी का, खाली जेब भी कितनी भारी होती है’।
सतीश बंसल ने बचपन और गाँव का चित्रांकन करता गीत प्रस्तुत किया एवं श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।