प्रो.डॉ. शरद नारायण खरे
मंडला(मध्यप्रदेश)
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जान लें आप कि हम तो साहित्य के नये परिंदे हैं,
मन में है सृजन का आवेग, भले ही गति में मंदे हैं।
काव्य के प्रति अनुराग हमारा, अंतर्मन में हर्ष लिए
लेखन के प्रति नवल चेतना, हर पल ही संघर्ष लिए
भले नये पर करें साधना, हमने लिखना जाना है,
अनुशासन में रहते हैं नित, हमने सच पहचाना है
हम वो नहीं हैं जिनके लिए साहित्य के फैले धंधे हैं,
मन में है सृजन का आवेग, भले ही गति में मंदे हैं।
लिखते भी हैं, पढ़ते भी हैं, उड़ना सीख रहे हैं,
गिरते भी हैं-उठते भी हैं, लड़ना सीख रहे हैं
सबके हित के भाव सँजोकर लिए चेतना हम भी,
भले नये हैं, पर हैं चोखे, करें साधना हम भी
साहित्य का मूल्य जानते हम, कदापि न हम अंधे हैं,
मन में है सृजन का आवेग, भले ही गति में मंदे हैं।
कुछ वरिष्ठ आँखें दिखलाते, कहते मूरख हमको,
कहते तुम लिखना क्या जानो, समझ नहीं है तुमको
हर बाधा को पार कर रहे, बनना है कुछ चोखा,
सीख रहे हम उड़ना नित ही, नहीं दे रहे धोखा।
प्रतिकूलताओं में भी बढ़ते आगे, काटकर सारे फंदे हैं,
मन में है सृजन का आवेग, भले ही गति में मंदे हैं॥
परिचय–प्रो.(डॉ.)शरद नारायण खरे का वर्तमान बसेरा मंडला(मप्र) में है,जबकि स्थायी निवास ज़िला-अशोक नगर में हैL आपका जन्म १९६१ में २५ सितम्बर को ग्राम प्राणपुर(चन्देरी,ज़िला-अशोक नगर, मप्र)में हुआ हैL एम.ए.(इतिहास,प्रावीण्यताधारी), एल-एल.बी सहित पी-एच.डी.(इतिहास)तक शिक्षित डॉ. खरे शासकीय सेवा (प्राध्यापक व विभागाध्यक्ष)में हैंL करीब चार दशकों में देश के पांच सौ से अधिक प्रकाशनों व विशेषांकों में दस हज़ार से अधिक रचनाएं प्रकाशित हुई हैंL गद्य-पद्य में कुल १७ कृतियां आपके खाते में हैंL साहित्यिक गतिविधि देखें तो आपकी रचनाओं का रेडियो(३८ बार), भोपाल दूरदर्शन (६ बार)सहित कई टी.वी. चैनल से प्रसारण हुआ है। ९ कृतियों व ८ पत्रिकाओं(विशेषांकों)का सम्पादन कर चुके डॉ. खरे सुपरिचित मंचीय हास्य-व्यंग्य कवि तथा संयोजक,संचालक के साथ ही शोध निदेशक,विषय विशेषज्ञ और कई महाविद्यालयों में अध्ययन मंडल के सदस्य रहे हैं। आप एम.ए. की पुस्तकों के लेखक के साथ ही १२५ से अधिक कृतियों में प्राक्कथन -भूमिका का लेखन तथा २५० से अधिक कृतियों की समीक्षा का लेखन कर चुके हैंL राष्ट्रीय शोध संगोष्ठियों में १५० से अधिक शोध पत्रों की प्रस्तुति एवं सम्मेलनों-समारोहों में ३०० से ज्यादा व्याख्यान आदि भी आपके नाम है। सम्मान-अलंकरण-प्रशस्ति पत्र के निमित्त लगभग सभी राज्यों में ६०० से अधिक सारस्वत सम्मान-अवार्ड-अभिनंदन आपकी उपलब्धि है,जिसमें प्रमुख म.प्र. साहित्य अकादमी का अखिल भारतीय माखनलाल चतुर्वेदी पुरस्कार(निबंध-५१० ००)है।