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लो जनम इस धरा पर यही

जी.एल. जैन
जबलपुर (मध्यप्रदेश)
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श्रीरामजी की मर्यादा के रामराज्य की आराधना,
श्रीकृष्णजी के अर्जुन के युद्ध की सार्थक साधना
शिखर पुरुष सुशासन की गंगा बहाने वाले,
तुम लो जनम इस धरा पर यही हमारी मनोकामना।

जिन्होंने मौत को भी, दूर से ललकारा,
उनकी मुट्ठी में कैद, वक़्त भी हारा
मरने की फुर्सत ही कहाँ थी अटल जी को,
काम था, भारत के नवनिर्माण का बहुत सारा।

जो जिये देशसेवा के लिए वह है अटल प्यारा,
भीष्म पितामह ‘भारत रत्न’ राष्ट्रपुरुष सबसे न्यारा,
नदियों को नदियों की जलधारा से जोड़कर,
कश्मीर से कन्याकुमारी तक भारत निखारा।

किसी शक्ति के आगे झुके नहीं, वह है अटल अंगारा,
परमाणु परीक्षण का निर्णय दूरदर्शी वतन का रखवारा।
कारगिल युद्ध को जीतकर इतिहास रच डाला,
खंडित भारत को अखंडता का दिया जयकारा॥