पानी का महत्व

रूपेश कुमार
सिवान(बिहार) 
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प्राकृतिक संसाधनों में जल एक ऐसा आधारभूत संसाधन है,ज़िसके बिना पृथ्वी तल पर जीवन की कल्पना असंभव है। अगर देखा जाए तो हमारे देश में लगभग २० करोड़ लोगों को पीने के लिए साफ पानी नहीं मिल पाता है और पूरे विश्व में यह आंकड़ा १.३० अरब का और दुनियाभर में लगभग हर रोज लगभग ६ अरब लोगों की मौत अशुद्ध पानी पीने से हो जाती है। पृथ्वी पर जितना भी पानी मौजूद हैं उसका ९७ प्रतिशत भाग खारा है सिर्फ ३ प्रतिशत हिस्सा ही पीने योग्य पानी का है। इसमें से भी २ फीसदी पानी बर्फ के रुप में है। यानि हमारे पास पीने योग्य पानी सिर्फ १ प्रतिशत ही है,वहीं विश्व में प्रति १० व्यक्तियों में से २ व्यक्तियों को पीने का शुद्ध पानी नहीं मिल पाता है।

आज ‘वैश्विक तापन या भूमंडलीय ऊष्मीकरण (ग्लोबल वार्मिंग)’ के कारण जल और वायु सर्वाधिक प्रभावित हुए हैं। तापमान की अधिकता के कारण दुनियाभर के ग्लेशियर बड़ी तेजी से पिघल रहे हैं। इसका सबसे बड़ा कारण शुद्ध जल भंडारों के क्षरण के रूप में होगा। इनके पिघलने से नदियों में पहले तेज बाढ़ आ जाएगी और फिर सूखने लगेगी। नदियों और अन्य जलाशयों में पानी की उपलब्धता कम हो जाएगी और पानी के लिए हाहाकार मच जाएगा। इन दिनों अफ्रीका के अनेक देश दूषित पानी पीने के लिए मजबूर हैं,जिसका परिणाम यह है कि वहां के लोग अनेक रोगों से ग्रसित हैं। विश्व स्तर पर पर्यावरण और पानी बचाने के लिए अनेक सम्मेलन होते हैं। इसमे बड़े-बड़े नेता इसके लिए राय भी देते हैं,तमाम तरह के कानून बनाते हैं,  लेकिन जमीनी स्तर पर इसे लागू नहीं कर पाते,जिसका परिणाम है कि लगातार जलसंकट गहराता जा रहा है। जिस स्तर से जनसंख्या बढ़ रही है,पानी की मांग भी उतनी ही बढ़ती जा रही है। एक अध्ययन से पता चला है कि सन २०२५ तक विकासशील देशों में पानी की मांग में ५० फीसदी की वृद्धि हो जाएगी, जबकि विकसित देशों में पानी की खपत में १८ फ़ीसदी की बढ़ोतरी होगी। जब पानी की उपलब्धता कम हो जाएगी,तब स्वाभाविक है कि इसे पाने के लिए लोग आपस में लड़ेंगे। सभी देश यही कोशिश कर रहे हैं कि,जो भी नदियां हैं उन्हें अपने देश की दिशा में मोड़कर अधिक से अधिक पानी का उपयोग कर सकें, जिससे दूसरे देश को मिलने वाला पानी बंद हो जा रहा है। पानी के बंटवारे को लेकर कई देशों के बीच विवाद बढ़ने भी शुरू हो चुके हैं। यदि इस स्थिति को समय रहते नहीं सुधारा गया तो सचमुच तीसरा विश्व युद्ध पाने के लिए ही होगा। भविष्य में जलसंकट से निजात पाने के लिए सरकारी और व्यक्तिगत दोनों ही स्तर पर प्रयास होना चाहिए। विकसित और विकासशील देश आपसी समझौते के तहत कार्बन उत्सर्जन की मात्रा कम करके वैश्विक तापन को नियंत्रित कर सकते हैं। इससे हिमनद या हिमानी (ग्लेशियर्स) का पिघलना कम होगा और जलसंकट भी दूर हो सकेगा,इसलिए जीवन को बचाने के लिए पानी का संरक्षण अति आवश्यक है। इससे निष्कर्ष निकलता है कि जल से जल संसाधन का उपयोग करें,दुरुपयोग नहीं। कहा भी गया है कि-

           ‘जल जीवन का अनमोल रतन,
            इसे बचाने का करो जतन।’

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2 Comments

  1. पानी के महत्व
    “दुनियाभर में लगभग हर रोज लगभग ६ अरब लोगों की मौत अशुद्ध पानी पीने से हो जाती है। ” में इस आंकड़े को कृपया ठीक करें। ६अरब नहीं हो सकता है हर रोज!

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