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अंधेरे को मिटाना जरूरी

अलका ‘सोनी’
पश्चिम वर्धमान(पश्चिम बंगाल)
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दीपावली पर्व स्पर्धा विशेष ……

रात के अंधेरे को अब मिटाना जरूरी है,
इसलिए एक दीया जलाना जरूरी है।

चले आ रहे हैं पथिक कई इस ओर,
राह उनको दिखाना जरूरी है।

जगमगा रहा है देखो दिग-दिगन्त,
घर को भी झिलमिलाना जरूरी है।

सजा रहे हर रंग जीवन में सदा,
द्वार पर रंगोली सजाना जरूरी है।

शबरी के बेर शौक से प्रभु ने थे खाये,
अपने हाथों से लड्डू खिलाना जरूरी है।

आतिशबाजी कर लेंगे हम बाद में,अभी
घर किसी के दीया दे आना जरूरी है।

त्यौहार है यह खुशियों से भरा,
संग सबके मिलकर मनाना जरूरी है…॥

परिचयअलका ‘सोनी’ का जन्म २३ नवम्बर १९८६ को देवघर(झारखंड)में हुआ है। बर्नपुर(पश्चिम बंगाल)में आपका स्थाई निवास है। जिला-पश्चिम वर्धमान निवासी अलका ‘सोनी’ की पूर्ण शिक्षा-एम.ए.(हिंदी) व बी.एड. है। लेखन विधा-कविता,लघुकथा व आलेख आदि है। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित हैं। आपको अनेक मंचों द्वारा सम्मान-पुरस्कार दिए गए हैं। लेखनी का उद्देश्य-आत्मसंतुष्टि व समाज कल्याण है। पसंदीदा हिन्दी लेखक-प्रेरणापुंज रामधारी सिंह ‘दिनकर’ एवं ‘निराला’ हैं। इनका जीवन लक्ष्य-साहित्य में कुछ करना है। देश और हिंदी भाषा के प्रति आपके विचार-‘हिंदी के प्रति लोगों का नजरिया बदला है और आगे भी सकारात्मक बदलाव होंगे।’

 

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