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अडिग हिमालय

सुबोध कुमार शर्मा 
शेरकोट(उत्तराखण्ड)

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अडिग हिमालय लिये शिवालय,
करता सबका आवाहन।
त्याग करो प्रमाद द्वेष का,
करो प्रकृति आराधन।
नंदा देवी पंचाचूली,
जीवन को हर्षित करती।
नैना देवी आशीष हमें दे,
नव संबल मन में भरती।
जो भी आता है यहां प्रवास को,
रम जाता है उसका मनll
अडिग हिमालय…,

कल-कल निर्झर मधुर स्वर,
कहता है गतिमय हो अविरल।
वर्तमान स्वर्णिम बना लो,
मत सोचो क्या होगा कल।
देशप्रेम सर्वोच्च प्रेम है,
कर दो अर्पित तन मन धन।
अडिग हिमालय लिये शिवालय,
करता सबका आवाहनll

परिचय – सुबोध कुमार शर्मा का साहित्यिक उपनाम-सुबोध है। शेरकोट बिजनौर में १ जनवरी १९५४ में जन्मे हैं। वर्तमान और स्थाई निवास शेरकोटी गदरपुर ऊधमसिंह नगर उत्तराखण्ड है। आपकी शिक्षा एम.ए.(हिंदी-अँग्रेजी)है।  महाविद्यालय में बतौर अँग्रेजी प्रवक्ता आपका कार्यक्षेत्र है। आप साहित्यिक गतिविधि के अन्तर्गत कुछ साहित्यिक संस्थाओं के संरक्षक हैं,साथ ही काव्य गोष्ठी व कवि सम्मेलन कराते हैं। इनकी  लेखन विधा गीत एवं ग़ज़ल है। आपको काव्य प्रतिभा सम्मान व अन्य मिले हैं। श्री शर्मा के लेखन का उद्देश्य-साहित्यिक अभिरुचि है। आपके लिए प्रेरणा पुंज पूज्य पिताश्री हैं।