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अब इंसाफ होगा

दुर्गेश कुमार मेघवाल ‘डी.कुमार ‘अजस्र’
बूंदी (राजस्थान)
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इंतजार बस इंतजार,
राम का ही बस इंतजार
बढ़ रहा है, बढ़ रहा है,
हर ओर रावण अत्याचार।

सह रहे हैं, सह रहे हैं,
मुँह से कुछ ना कह रहे हैं
घाव जो फोड़े बने हैं,
नदियाँ बन-बन बह रहे हैं।

जुल्म की पराकाष्ठा तक,
सहने की इक सीमा होती
ना विरोध में हाथ खड़ा हो,
जुल्मो-रंज में आप रोती।

पेट भूखा, बदन सूखा,
न मिले अब रूखा-सूखा
गोद बच्चा रोने लगता,
माँ की ममता फिर क्यों सोती।

पाप जो पापी का जब भी,
हद से आगे जा बढ़ा है
डोल उठे तब यह धरती,
पाप ज्वारी जब-जब चढ़ा है।

देवता, अवतारियों की,
जो कथाएं हमने सुनी है
मिटा पाप को, धरती का तब,
उन तड़प, यह राह चुनी है।

एक ने जो उठाया बीड़ा,
जय-जय जनता हूक उठी
आशीष उसका भी बना रहा,
होनी ही थी वो बात अनूठी।

ना माया, ना चमत्कार वह,
जन-साहस का वो चमत्कार
इंसा सद्गुण, मिलकर उसमें,
कर देते सब पाप संहार।

मत रहो तुम, मत रहो तुम,
मौन साधे मत रहो तुम
उस विधाता नाम लेकर,
पाप-प्रतिकार अब करो तुम।

सहते-सहते सीमा आई,
सहना भी अब पाप होगा
अन्याय हद से बढ़ गया तो,
अब ‘अजस्र’ इंसाफ होगा।

सत्य-असत्य खेल में अब,
ना गलत, अपवाद होगा।
‘हत्या’ ना पाप की फिर,
‘वध’ से ही वो बर्बाद होगा॥

परिचय–आप लेखन क्षेत्र में डी.कुमार ‘अजस्र’ के नाम से पहचाने जाते हैं। दुर्गेश कुमार मेघवाल की जन्मतिथि १७ मई १९७७ तथा जन्म स्थान बूंदी (राजस्थान) है। आप बूंदी शहर में इंद्रा कॉलोनी में बसे हुए हैं। हिन्दी में स्नातकोत्तर तक शिक्षा लेने के बाद शिक्षा को कार्यक्षेत्र बना रखा है। सामाजिक क्षेत्र में आप शिक्षक के रुप में जागरूकता फैलाते हैं। लेखन विधा-काव्य और आलेख है,और इसके ज़रिए ही सामाजिक मीडिया पर सक्रिय हैं। आपके लेखन का उद्देश्य-नागरी लिपि की सेवा,मन की सन्तुष्टि,यश प्राप्ति और हो सके तो अर्थ प्राप्ति भी है। २०१८ में श्री मेघवाल की रचना का प्रकाशन साझा काव्य संग्रह में हुआ है। आपकी लेखनी को बाबू बालमुकुंद गुप्त साहित्य सेवा सम्मान आदि मिले हैं।

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