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आज फिर

रश्मि लहर
लखनऊ (उत्तर प्रदेश)
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आज फिर मन को तुम्हारी झलकियाॅं याद आ गईं,
थरथराती साॅंझ की कुछ सुर्ख़ियाँ याद आ गईं।

वो हर इक आहट पे खुलती खिड़कियाॅं याद आ गईं,
फिर फ़िज़ा में रंग भरती तितलियाॅं याद आ गईं।

थाम कर पतवार माॅंझी था मगन, पर उस घड़ी,
जूझती तूफ़ान से कुछ कश्तियाँ याद आ गईं।

वो तेरी भीगी पलक कन्धे पे मेरे सर तेरा,
अनमने-अलगाव की वो सिसकियाॅं याद आ गईं।

बाद मुद्दत द्वार पर थपकी सुनी उस माँ ने जब,
उसके चेहरे की चमक बेताबियाँ याद आ गईं॥