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आन तिरंगा

तारा प्रजापत ‘प्रीत’
रातानाड़ा(राजस्थान) 
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अपना सम्मान तिरंगा….


आन तिरंगा, शान तिरंगा,
हिंदुस्तान की जान तिरंगा।

 हँसते-हँसते चढ़ गए फांसी,
 शहीदों का हैं मान तिरंगा।

 मरते वक़्त भी यही इल्तज़ा,
 बने कफ़न अरमान तिरंगा।

 दिल-ओ-जान से है ये प्यारा,
 फरिश्तों का फ़रमान तिरंगा।

 गोलियों की बौछार कभी तो,
 मधुर मुरली की तान तिरंगा।

 भारत का सरताज़ बना है,
 होंठों की मुस्कान तिरंगा।

पावन धरा है भारत माँ की,
ऋषि-मुनियों का ज्ञान तिरंगा।

गोद में पल कर जवां हुआ है,
भारत माँ की संतान तिरंगा।

 किसी क़ीमत पे न झुकने देंगे,
 हम सबका अभिमान तिरंगा॥

परिचय– श्रीमती तारा प्रजापत का उपनाम ‘प्रीत’ है।आपका नाता राज्य राजस्थान के जोधपुर स्थित रातानाड़ा स्थित गायत्री विहार से है। जन्मतिथि १ जून १९५७ और जन्म स्थान-बीकानेर (राज.) ही है। स्नातक(बी.ए.) तक शिक्षित प्रीत का कार्यक्षेत्र-गृहस्थी है। कई पत्रिकाओं और दो पुस्तकों में भी आपकी रचनाएँ प्रकाशित हुई हैं,तो अन्य माध्यमों में भी प्रसारित हैं। आपके लेखन का उद्देश्य पसंद का आम करना है। लेखन विधा में कविता,हाइकु,मुक्तक,ग़ज़ल रचती हैं। आपकी विशेष उपलब्धि-आकाशवाणी पर कविताओं का प्रसारण होना है।