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इंसान हूँ मैं…

दुर्गेश कुमार मेघवाल ‘डी.कुमार ‘अजस्र’
बूंदी (राजस्थान)
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इंसान हूँ मैं…
इंसान ही बनना चाहता हूँ।
कई आदर्श हैं इस जीवन के
फिर भी नहीं चाहता,
भगवान बनना।
इंसान हूँ मैं…
इंसान ही बनना चाहता हूँ॥

सब जन को है चाह…
देव बन,
पूजे जाएं,
पर…खामियां इंसानों की,
कैसे कोई छिपाएं….?
लोगों की इन खामियों पर,
कुछ…
कहना चाहता हूँ।
इंसान हूँ मैं…,
इंसान ही बनना चाहता हूँ॥

कई ऐब हैं,मुझमें भी,
होगी कई खामियाँ भी।
छोडूं…मिटाऊँ कितनी ही,
रहेगी कुछ तो फिर भी।
इन ऐब-खामियों को ही,
पहचान बनाना चाहता हूँ।
इंसान हूँ मैं…,
इंसान ही बनना चाहता हूँ॥

कई दर्द हैं,जीवन के,
सहना तो जीवनभर है।
जीवन की जोत बुझेगी ही,
जीना आखिर तो है।
फिर भी इसी जीवन-नद में,
बहना चाहता हूँ।
इंसान हूँ मैं…,
इन्सान ही बनना चाहता हूँ॥

जीवन पार होता है,
गर कहीं उस पार स्वर्ग भी।
नहीं चाहिए स्वर्ग,
जो होता है गर कहीं मोक्ष भी।
सदके इसी मृत्यु लोक के,
मैं रहना चाहता हूँ।
इंसान हूँ मैं…,
इंसान ही बनना चाहता हूँ॥

परिचय–आप लेखन क्षेत्र में डी.कुमार’अजस्र’ के नाम से पहचाने जाते हैं। दुर्गेश कुमार मेघवाल की जन्मतिथि-१७ मई १९७७ तथा जन्म स्थान-बूंदी (राजस्थान) है। आप राजस्थान के बूंदी शहर में इंद्रा कॉलोनी में बसे हुए हैं। हिन्दी में स्नातकोत्तर तक शिक्षा लेने के बाद शिक्षा को कार्यक्षेत्र बना रखा है। सामाजिक क्षेत्र में आप शिक्षक के रुप में जागरूकता फैलाते हैं। लेखन विधा-काव्य और आलेख है,और इसके ज़रिए ही सामाजिक मीडिया पर सक्रिय हैं।आपके लेखन का उद्देश्य-नागरी लिपि की सेवा,मन की सन्तुष्टि,यश प्राप्ति और हो सके तो अर्थ प्राप्ति भी है। २०१८ में श्री मेघवाल की रचना का प्रकाशन साझा काव्य संग्रह में हुआ है। आपकी लेखनी को बाबू बालमुकुंद गुप्त साहित्य सेवा सम्मान-२०१७ सहित अन्य से सम्मानित किया गया है|

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